लोकसभा में भारी हंगामे के बीच ‘जी राम जी’ बिल पेश, प्रियंका गांधी ने कहा- ‘नाम बदलने की सनक समझ से बाहर’

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला जब केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025’ पेश किया। विपक्ष इसे ‘जी राम जी’ बिल कहकर आलोचना कर रहा है, क्योंकि यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा और योजना से ‘गांधी’ नाम हटा देगा।

बिल पेश होते ही कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सांसद वेल में उतर आए और नारेबाजी शुरू कर दी। सदन में अफरा-तफरी मच गई और कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने नियम 72(1) के तहत कड़ी आपत्ति जताते हुए बिल का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि मनरेगा पिछले 20 सालों से ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है, जो गरीबों को 100 दिन का कानूनी रोजगार अधिकार देता है। नया बिल इस अधिकार को कमजोर करेगा और केंद्र का अनावश्यक नियंत्रण बढ़ाएगा।

प्रियंका गांधी ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “हर योजना का नाम बदलने की यह सनक मेरी समझ से बाहर है। इसमें कितना खर्च होता है, सरकारी कागजात, बोर्ड, प्रचार सामग्री सब बदलनी पड़ती है। यह जनता के पैसे की बर्बादी है।” उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं थे, लेकिन पूरे देश के परिवार जैसे हैं। गांधी जी को राम राज की कल्पना थी, लेकिन उनका नाम हटाना संविधान की भावना के खिलाफ है।

विपक्ष का आरोप है कि यह बिल पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करेगा और फंडिंग का बोझ राज्यों पर डालेगा। नए बिल में रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात है, लेकिन मजदूरी दर बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे महात्मा गांधी का अपमान बताया।

सरकार की ओर से शिवराज सिंह चौहान ने सफाई दी कि यह बिल ग्रामीण रोजगार को और मजबूत बनाएगा और विकसित भारत की दिशा में कदम है। उन्होंने कहा कि गांधी जी राम राज की बात करते थे, इसलिए नया नाम उचित है। लेकिन विपक्ष ने बिल को स्थायी समिति में भेजने या वापस लेने की मांग की।

इस मुद्दे पर सदन के बाहर भी विपक्षी सांसदों ने महात्मा गांधी की तस्वीर के साथ प्रदर्शन किया। राजनीतिक गलियारों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या यह सिर्फ नाम बदलने का मामला है या योजना की मूल भावना पर हमला। शीतकालीन सत्र में यह बिल बड़ा विवाद का केंद्र बन गया है।