राम मंदिर आंदोलन के दिग्गज संत डॉ. रामविलास दास वेदांती का निधन, सीएम योगी ने जताया गहरा शोक

अयोध्या: राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख योद्धा और पूर्व भाजपा सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का 15 दिसंबर 2025 को निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। मध्य प्रदेश के रीवा में रामकथा कार्यक्रम के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से संत समाज, राम भक्तों और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

डॉ. वेदांती राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दिनों से सक्रिय थे। वे विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रमुख नेता रहे और 1992 के कारसेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अयोध्या से दो बार सांसद रह चुके वेदांती जी ढांचा विध्वंस मामले में भी आरोपी थे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य के रूप में भी उन्होंने योगदान दिया।

निधन कैसे हुआ?
10 दिसंबर को डॉ. वेदांती रीवा पहुंचे थे, जहां वे रामकथा सुना रहे थे। अचानक सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने भरसक प्रयास किए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनका पार्थिव शरीर अयोध्या लाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है।

कौन थे रामविलास दास वेदांती?
राम मंदिर आंदोलन का चेहरा: डॉ. रामविलास दास वेदांती श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी संतों और सूत्रधारों में से एक थे। उन्होंने सड़क से लेकर संसद तक राम मंदिर निर्माण की आवाज को मजबूती से उठाया।

  • राजनीतिक सफर: वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे और 1996 में मछलीशहर तथा 1998 में प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे।
  • बाबरी ढांचा मामला: वह बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी थे, लेकिन बाद में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था।

नेताओं की श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. वेदांती का जाना सनातन धर्म और राम मंदिर आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है। सीएम योगी ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को सांत्वना दी। कई अन्य भाजपा नेता, संत और राम भक्तों ने भी उन्हें याद किया।

डॉ. वेदांती की सादगी, राम भक्ति और संघर्षपूर्ण जीवन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा रहेगा। राम मंदिर निर्माण के सपने को साकार होते देखने के बाद उनका जाना एक युग का अंत माना जा रहा है।