लखनऊ: उत्तर प्रदेश भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष पद पर पूर्वांचल के नेताओं का लंबे समय से दबदबा रहा है। पिछले 14 प्रदेश अध्यक्षों में से 11 पूर्वांचल क्षेत्र से ही रहे हैं। अब इस कड़ी में महाराजगंज से सात बार के सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम जुड़ने जा रहा है। शनिवार को उन्होंने नामांकन दाखिल किया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रस्तावक बने।
पंकज चौधरी कुर्मी (ओबीसी) समुदाय के प्रमुख चेहरा हैं और पूर्वांचल में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। केवल उनके नामांकन के बाद निर्विरोध चुनाव तय माना जा रहा है। 14 दिसंबर को औपचारिक घोषणा होगी।
यह नियुक्ति 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए रणनीतिक कदम है। पार्टी ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने और पूर्वांचल में संगठन को और धार देने की कोशिश कर रही है। पूर्वांचल की सीटों पर लोकसभा चुनाव में मिली चुनौतियों के बाद यह फैसला अहम है।
भाजपा की 2027 विधानसभा चुनावों की रणनीति है।
2024 लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की कई सीटों पर पार्टी को नुकसान हुआ और ओबीसी (खासकर गैर-यादव) वोटों में बिखराव दिखा। समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट के लिए भाजपा ने ओबीसी चेहरे पर दांव लगाया है।
पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय (ओबीसी की प्रभावशाली जाति) से आते हैं, जो यादवों के बाद सबसे बड़ा ओबीसी समूह है। कुर्मी वोट पूर्वांचल, अवध और तराई क्षेत्र में 30-40 सीटों पर असर डालते हैं। महाराजगंज से सात बार सांसद चुने जाने का उनका रिकॉर्ड और बेदाग छवि उन्हें मजबूत बनाती है।
पूर्वांचल में उनकी गहरी पकड़ है (गोरखपुर विश्वविद्यालय से पढ़े, नगर निगम पार्षद से शुरूआत)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पूर्वांचल से हैं, ऐसे में संगठन और सरकार का क्षेत्रीय संतुलन बनता है।
पंकज चौधरी मोदी सरकार में दो बार केंद्रीय मंत्री रहे और शीर्ष नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं। 2023 में प्रधानमंत्री मोदी उनके घर गए थे, जो उनकी विश्वसनीयता दिखाता है।
केवल उनके नामांकन से निर्विरोध चुनाव तय हो गया, जिसमें सीएम योगी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रस्तावक बने। यह पार्टी की एकजुटता और रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
- कब-कब कौन बना प्रदेश भाजपा अध्यक्ष-
- माधव प्रसाद त्रिपाठी 1980
- कल्याण सिंह 1984
- राजेंद्र कुमार गुप्ता 1990
- कलराज मिश्रा 1991
- राजनाथ सिंह 1997
- ओम प्रकाश सिंह सन 2000
- कलराज मिश्रा 2000
- विनय कटियार सन 2002
- केशरीनाथ त्रिपाठी 2004
- डॉ रमापति राम त्रिपाठी 2007
- सूर्य प्रताप शाही 2010
- लक्ष्मीकांत वाजपेई 2012
- केशव प्रसाद मौर्य 2016
- महेंद्र नाथ पाण्डेय 2017
- स्वतंत्र देव सिंह 2019
- भूपेंद्र सिंह चौधरी 2022 से अब तक