कोलकाता : पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया ने राजनीतिक पारा गरम कर दिया है। आयोग द्वारा जारी ताजा डेटा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विधानसभा सीट भवानीपुर से 44,787 वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के नंदीग्राम से कटे नामों (10,599) से लगभग चार गुना ज्यादा है। यह खुलासा SIR की समयसीमा खत्म होने के एक दिन बाद आया है, जिससे 2026 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है।
भवानीपुर को ममता का गढ़ माना जाता है, जहां उन्होंने 2021 उपचुनाव में 58,832 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। वहीं नंदीग्राम में 2021 में शुभेंदु ने ममता को हराया था। अब SIR डेटा ने दोनों नेताओं की सीटों पर अलग-अलग असर दिखाया है, जिसे भाजपा ‘फर्जी वोटरों की सफाई’ बता रही है, जबकि टीएमसी इसे ‘राजनीतिक साजिश’ करार दे रही है।
SIR डेटा का पूरा ब्यौरा: भवानीपुर vs नंदीग्राम
चुनाव आयोग के अनुसार, ये नाम मृत्यु, पता बदलना, डुप्लिकेट एंट्री या अनट्रेसेबल होने की वजह से हटाए गए हैं। प्रक्रिया पारदर्शी और पूरे राज्य में एकसमान बताई जा रही है।
भवानीपुर में प्रभाव: शहरी इलाका होने से माइग्रेशन और पुरानी एंट्रीज ज्यादा। यहां कटे नामों की संख्या राज्य में दूसरी सबसे ज्यादा।
नंदीग्राम में कम असर: ग्रामीण क्षेत्र, जहां वोटर स्थिरता ज्यादा। शुभेंदु के गढ़ में कम डिलीशन से भाजपा को फायदा का अनुमान।
राज्य स्तर पर: पूरे बंगाल में 58-59 लाख नाम हटे। सबसे ज्यादा चौरंगी (74,553), कोलकाता पोर्ट (63,730)। दक्षिण 24 परगना जिले में 8 लाख+ डिलीशन – अभिषेक बनर्जी का गढ़।