यूपी BJP अध्यक्ष पद के लिए पंकज चौधरी का नाम लगभग फाइनल: योगी के गढ़ गोरखपुर से, 7 बार सांसद और केंद्रीय मंत्री!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश भाजपा में लंबे इंतजार के बाद बड़ा फैसला होने वाला है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महराजगंज से 7 बार के सांसद पंकज चौधरी का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए लगभग फाइनल हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाने वाले पंकज चौधरी को यह जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, जो 2027 विधानसभा चुनाव से पहले OBC वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। आज (13 दिसंबर) नामांकन और कल (14 दिसंबर) औपचारिक ऐलान होगा, जिसमें लखनऊ में भव्य आयोजन की तैयारी है।

पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय (OBC) से आते हैं और पूर्वांचल में उनकी मजबूत पकड़ है। वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से ताल्लुक रखते हैं, जहां उनका मूल निवास है। पार्टी हाईकमान ने OBC चेहरे को तरजीह देते हुए उनका नाम चुना, क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव में PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) की राजनीति से भाजपा को नुकसान हुआ था। अमित शाह ने खुद उनकी निष्ठा की तारीफ की है और कहा था कि “ऐसा सांसद दीया लेकर ढूंढने पर भी नहीं मिलेगा”।

पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर: पार्षद से केंद्रीय मंत्री तक

जन्म और शुरुआत: 15 नवंबर 1964 को गोरखपुर में जन्म। पिता स्वर्गीय भगवती प्रसाद चौधरी उद्योगपति थे, मां उज्ज्वल चौधरी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष।

राजनीति की शुरुआत: 1989 में गोरखपुर नगर निगम पार्षद बने। 1990 में BJP जिला कार्यसमिति सदस्य।

सांसद का रिकॉर्ड: महराजगंज से 1991, 1996, 1998, 2004, 2014, 2019 और 2024 में जीत – कुल 7 बार।

केंद्रीय भूमिका: मोदी सरकार में वित्त राज्य मंत्री। पीएम मोदी और अमित शाह के करीबी, 2023 में मोदी उनके घर अचानक पहुंचे थे।

मजबूती: पूर्वांचल में कुर्मी वोटों की मजबूत पकड़, महराजगंज को भाजपा का गढ़ बनाया।

नामांकन और ऐलान की प्रक्रिया

आज (13 दिसंबर): लखनऊ BJP मुख्यालय में दोपहर 1 से 2 बजे तक नामांकन। केंद्रीय पर्यवेक्षक विनोद तावड़े मौजूद रहेंगे।

कल (14 दिसंबर): दोपहर 1 बजे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ऐलान करेंगे। अगर एक ही नामांकन हुआ तो चुनाव नहीं होगा।

स्वागत की तैयारी: हजारों कार्यकर्ता जुटेंगे, ढोल-नगाड़े, झंडियां और जुलूस। योगी आदित्यनाथ उनके प्रस्तावक हो सकते हैं।

क्यों चुना गया पंकज चौधरी? OBC फोकस की बड़ी वजह
भाजपा 2027 चुनाव में PDA की काट चाहती है। कुर्मी वोट (8-10%) 30-40 सीटों पर असर डालते हैं। अन्य दावेदारों में बीएल वर्मा, साध्वी निरंजन ज्योति, स्वतंत्र देव सिंह और धर्मपाल सिंह के नाम थे, लेकिन पंकज का पलड़ा भारी रहा। पार्टी सूत्र कहते हैं कि अमित शाह की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी।