MP : मध्य प्रदेश के इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन: राज्य अब नक्सलवाद के आतंक से पूरी तरह मुक्त हो गया है। बालाघाट जिले में गुरुवार को दो अंतिम नक्सलियों — दीपक उइके और रोहित — ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि प्रदेश में अब ‘लाल सलाम’ का अंत हो गया है। यह सफलता केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का परिणाम है, जहां पिछले 42 दिनों में ही 42 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इनमें कुल 7.75 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली शामिल थे। सीएम यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस समारोह को संबोधित किया और पुलिस व सुरक्षा बलों को बधाई दी।
अंतिम कदम नक्सल उन्मूलन की ओर
बालाघाट पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित इस कार्यक्रम में दीपक उइके और रोहित ने अपने हथियार सौंपे। ये दोनों नक्सली लंबे समय से सक्रिय थे और जिले के नक्सल प्रभाव वाले इलाकों में सक्रिय। सरेंडर पॉलिसी के तहत उन्हें तुरंत पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया गया।
इससे पहले, 7 दिसंबर को ही बालाघाट में एक और बड़ा सरेंडर हुआ था, जहां 10 हार्डकोर नक्सलियों ने सीएम के समक्ष हथियार डाले थे। इनमें 4 महिलाएं शामिल थीं और उनके सिर पर कुल 2.36 करोड़ रुपये का इनाम था। नक्सलियों ने AK-47, INSAS राइफल, SLR, सिंगल शॉट गन, BGL सेल और वॉकी-टॉकी जैसे घातक हथियार सौंपे। प्रमुख नक्सली सुरेंद्र उर्फ कबीर (77 लाख इनामी) भी इसी समूह का हिस्सा था, जो 1995 से सक्रिय था।
यह सरेंडर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमावर्ती नक्सल नेटवर्क के लिए करारा प्रहार है। डिंडोरी और मंडला जिले पहले ही नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुके थे, और अब बालाघाट के साथ पूरे राज्य का सफाया हो गया।
सीएम मोहन यादव का बयान: मोदी-शाह के नेतृत्व में देश सुरक्षित
कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में जनवरी 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प पूरा हो रहा है। मध्य प्रदेश ने इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाई है। पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के अदम्य साहस और बलिदान से बालाघाट से ‘लाल सलाम’ को 11 दिसंबर को अंतिम सलाम कर दिया गया है। यह दिन प्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।”
उन्होंने सरेंडर करने वाले नक्सलियों को संविधान की प्रतियां भेंट कीं और जोर देकर कहा, “जो कानून की राह अपनाते हैं, उनके पुनर्वास की चिंता सरकार करेगी। आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।” सीएम ने नक्सलियों से आह्वान किया कि वे मुख्यधारा में लौट आएं, क्योंकि हिंसा का कोई स्थान नहीं है।
राज्य सरकार के प्रयास: अभियान की मजबूती
मध्य प्रदेश सरकार ने नक्सल उन्मूलन के लिए कड़े कदम उठाए हैं। पिछले कुछ महीनों में 15 नए अस्थायी कैंप स्थापित किए गए, हॉक फोर्स और विशेष सहयोगी दस्ते में 882 नए पद स्वीकृत हुए। सतत निगरानी, सघन कार्रवाई और पुनर्वास नीति ने नक्सली दायरे को तेजी से सिकुड़ने पर मजबूर कर दिया। डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि यह सफलता एंटी-नक्सल अभियान की सशक्तीकरण का परिणाम है। परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारी इस समारोह में मौजूद रहे।
MP नक्सल आतंक से पूरी तरह मुक्त: बालाघाट में नक्सलियों के सरेंडर पर बोले CM मोहन यादव, ‘लाल सलाम को अंतिम सलाम’
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