बिहार कांग्रेस में घमासान: सिर्फ 6 विधायकों में भी नहीं चुन पा रहे नेता, दिल्ली भेजी गई फाइल!, आलाकमान फैसला लेगा

बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की करारी हार के बाद कांग्रेस में आंतरिक कलह चरम पर पहुंच गई है। पार्टी के पास अब सिर्फ 6 विधायक बचे हैं, लेकिन इनमें से भी विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं हो पा रहा। आंतरिक गुटबाजी और टिकट वितरण को लेकर असंतोष के चलते बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी (BPCC) ने हाईकमान को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है, जिसमें हार के कारणों, संगठनात्मक कमजोरियों और विधायकों की स्थिति का जिक्र है।

सूत्रों के अनुसार,
ये 6 विधायक विभिन्न गुटों में बंटे हुए हैं। एक गुट राज्य अध्यक्ष राजेश राम के समर्थक है, तो दूसरा प्रभारी कृष्णा अल्लावरू के खिलाफ विद्रोह कर रहा है। टिकट न मिलने पर कई पूर्व विधायकों ने सड़क पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद 7 नेताओं को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। अब हाईकमान को फैसला लेना है कि विधायक दल का नेता कौन बनेगा – क्या कोई स्थानीय चेहरा या दिल्ली से कोई भेजा जाए।

BPCC के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“चुनाव में 61 सीटों पर लड़े, सिर्फ 6 जीते। विधायकों में भी एकजुटता नहीं है। वोट चोरी, EC की पक्षपातपूर्ण भूमिका और RJD से सहयोग न मिलने की शिकायतें हैं। हाईकमान ने सभी उम्मीदवारों और विधायकों से रिपोर्ट मांगी थी, जो अब दिल्ली पहुंच चुकी है। अगले कुछ दिनों में फैसला होगा।”

राष्ट्रीय स्तर पर भी विवाद गहरा गया है। RJD ने कांग्रेस को हार का जिम्मेदार ठहराते हुए गठबंधन तोड़ने तक की धमकी दी है। RJD प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा, “कांग्रेस को अकेले लड़ना चाहिए, तभी उनकी असली ताकत पता चलेगी।” वहीं, कांग्रेस ने RJD पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है। हाईकमान की समीक्षा बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ और संगठन सुधार पर जोर दिया।

इस संकट ने INDIA गठबंधन को भी कमजोर कर दिया है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम चुनावों से पहले कांग्रेस को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। पार्टी ने बिहार में नया समन्वय समिति गठित की है, जो जमीनी स्तर पर मजबूती लाने का काम करेगी।