यूपी विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से: अनुपूरक बजट और 10 विधेयक पेश, महाकुंभ पर खर्च का फोकस

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से शुरू होगा, जो विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी, जिसमें महाकुंभ मेला 2025 के लिए भारी भरकम फंडिंग का फोकस होगा। सत्र के दौरान 10 महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें ऊर्जा, उद्योग और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कानून शामिल हैं। सत्र की अवधि 5-7 दिनों की बताई जा रही है, जो 25 दिसंबर तक चल सकता है। विपक्ष ने इसे ‘चुनावी बजट’ बताते हुए बहस की तैयारी की है, जबकि सरकार इसे ‘विकसित यूपी’ की दिशा में मील का पत्थर मान रही है।

मुख्यमंत्री योगी ने सत्र से पहले कहा, “यह सत्र न सिर्फ बजट की चर्चा का मंच बनेगा, बल्कि महाकुंभ जैसे वैश्विक आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने का अवसर भी। हम 144 वर्षों में एक बार आने वाले इस पर्व को इतिहास रचने वाला बनाएंगे।” विधानसभा सचिवालय के अनुसार, सत्र का उद्घाटन राज्यपाल से होगा, जिसमें अध्यादेशों को मंजूरी और नियमों की प्रस्तुति शामिल होगी। अनुपूरक बजट 20 दिसंबर को पेश होगा और अगले दिन चर्चा व पारित होगा।

अनुपूरक बजट का खास फोकस: महाकुंभ को मिलेगा लाइफलाइन फंड
राज्य वित्त विभाग के स्रोतों के मुताबिक, अनुपूरक बजट का आकार 12 से 15 हजार करोड़ रुपये का होगा, जिसमें महाकुंभ पर सबसे ज्यादा जोर। प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले इस मेगा इवेंट के लिए परिवहन, शहरी विकास, स्वास्थ्य और सुरक्षा विभागों को विशेष आवंटन मिलेगा।

  • परिवहन विभाग: 4,000 करोड़ – विशेष ट्रेनें, सड़कें और लॉजिस्टिक्स।
  • शहरी विकास: 3,500 करोड़ – घाटों का सौंदर्यीकरण, अस्थायी आवास और स्वच्छता।
  • अन्य विभाग: स्वास्थ्य (2,000 करोड़), सुरक्षा (2,500 करोड़) और पर्यावरण संरक्षण (1,000 करोड़)।
  • कुल मिलाकर, महाकुंभ पर 10 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च का अनुमान, जो 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के लिए जरूरी है। इसके अलावा, MSME और औद्योगिक विकास को 2-3 हजार करोड़ का हिस्सा मिलेगा।

10 विधेयक: कानूनी सुधारों का नया दौर
सत्र में पेश होने वाले विधेयकों में राज्य की आर्थिक व सामाजिक प्रगति पर फोकस:

  • यूपी ऊर्जा संशोधन विधेयक: बिजली वितरण में निजीकरण को मजबूत करने के लिए।
  • महिला सशक्तिकरण विधेयक: मिशन शक्ति के तहत नई योजनाओं को कानूनी आधार।
  • MSME प्रोत्साहन विधेयक: छोटे उद्योगों के लिए सब्सिडी और लोन सुविधा।
  • पर्यावरण संरक्षण विधेयक: महाकुंभ के दौरान गंगा सफाई पर जोर।
  • डिजिटल गवर्नेंस विधेयक: ई-सेवाओं को तेज करने के लिए।
  • 6-10: भूमि सुधार, कृषि सब्सिडी, युवा रोजगार और स्वास्थ्य बीमा से जुड़े संशोधन।

ये विधेयक विपक्ष के विरोध के बावजूद पारित होने की उम्मीद है, लेकिन सपा ने कहा कि वे ‘लोकतांत्रिक बहस’ सुनिश्चित करेंगे।

सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा, “महाकुंभ पर अरबों खर्च, लेकिन बेरोजगारी और महंगाई पर खामोशी। यह सत्र जनता के सवालों का जवाब दे।” संभावित मुद्दे: संभल हिंसा, बिजली निजीकरण और उपचुनाव अनियमितताएं। बीजेपी ने विपक्ष को ‘रचनात्मक बहस’ के लिए आमंत्रित किया है।