फिरोजपुर : पंजाब के फिरोजपुर में एक ऐसी घटना घटी जो मानवता को झकझोर देती है। 30 सितंबर को जिस पिता ने अपनी बेटी के हाथ बांधकर नहर में धक्का दे दिया था, वह बेटी 68 दिनों बाद जिंदा लौट आई है। नाबालिग प्रीत कौर ने मीडिया के सामने आकर अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई और पिता की रिहाई की गुजारिश की। पिता सुरजीत सिंह पर हत्या का प्रयास का केस दर्ज है और वह जेल में बंद हैं। प्रीत ने बताया कि वह नहर से कैसे बची, कैसे भूख-प्यास सहकर जिंदगी की जंग लड़ी, और अब तीन छोटी बहनों के भविष्य को देखते हुए सामने आई है।
घटना की शुरुआत 30 सितंबर की रात हुई, जब हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले सुरजीत सिंह को अपनी 16 वर्षीय बेटी प्रीत कौर पर एक स्थानीय लड़के से अवैध संबंध का शक हो गया। गुस्से में आकर सुरजीत ने प्रीत के दोनों हाथ चुन्नी से बांध दिए और पत्नी हरप्रीत कौर को साथ लेकर नहर के किनारे पहुंच गए। वीडियो बनाते हुए सुरजीत ने पूछा, “प्यार में क्या कमी रह गई थी?” प्रीत ने रोते हुए कहा, “कुछ नहीं।” फिर सुरजीत ने पंजाबी में कहा, “सुट्ट ती, मार के परे कीती, बाय-बाय” और जोरदार धक्का देकर उसे तेज बहाव वाली नहर में फेंक दिया। मां चीखती-चिल्लाती रहीं, लेकिन कुछ न कर सकीं। पूरा वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने सुरजीत को गिरफ्तार कर लिया।
प्रीत ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “पानी में धकेलते ही मैं डूबने लगी। हाथ बंधे होने से तैर नहीं पाई, लेकिन किसी तरह बहाव के साथ बहती रही। करीब आधे घंटे बाद नहर के किनारे घास पकड़ ली और बाहर निकल आई।” बाहर आने के बाद दो युवकों और एक महिला ने उसे लिफ्ट देकर एक गांव में छोड़ा। वहां भूख-प्यास से तड़पती रहीं।
प्रीत ने बताया, “मैंने कई दिनों तक जंगलों में छिपकर गुजारा किया। भूख लगने पर फल खाए, पानी नहर से ही पिया। डर लगता था कि पापा दोबारा न मार दें, इसलिए घर नहीं लौटी। लेकिन तीन छोटी बहनों का ख्याल आया – वे कौन पालेगा, कौन पढ़ाएगा? इसलिए मैं सामने आई।” प्रीत ने मां पर भी गुस्सा जताया, “मां चुपचाप खड़ी रहीं, रोकने की कोशिश तक न की।”
पुलिस ने शुरू में प्रीत को लापता मानकर नहरों में सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन वह छिपी हुई थी। अब प्रीत की गवाही पर केस में नया मोड़ आ गया है। एसएसपी फिरोजपुर भूपिंदर सिंह सिद्धू ने कहा, “लड़की जिंदा मिलना राहत की बात है। हम परिवार का बयान लेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे।” प्रीत ने पिता को माफ करने की बात कही, “पापा गलत थे, लेकिन जेल में रहकर क्या होगा? बहनों का भविष्य कौन संभालेगा? उन्हें छोड़ दें।” परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, और सुरजीत मजदूरी करते थे।
नहर में फेंकी बेटी 68 दिन बाद जिंदा निकली: फिरोजपुर में पिता ने हाथ बांधकर दिया धक्का, बेटी ने बताई दर्दनाक आपबीती
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