लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठ के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस मुद्दे को संभालते हुए रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है, इसलिए घुसपैठियों की सफाई अनिवार्य है। सीएम ने जनता से अपील की है कि किसी को घरेलू या व्यावसायिक काम पर रखने से पहले उनकी पहचान की पूरी जांच कर लें, क्योंकि सुरक्षा हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
यह अभियान हाल ही में पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू) अभियान के बाद तेज हुआ है, जहां घुसपैठियों ने अन्य राज्यों में शरण लेने की कोशिश की। यूपी सरकार ने घुसपैठियों को पहचानने, हिरासत में लेने और कानूनी रूप से निर्वासित करने के लिए एक समन्वित ढांचा तैयार किया है। एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड), जिला प्रशासन और गृह विभाग के सहयोग से पूरे राज्य में दस्तावेज सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। कई जिलों में संदिग्ध रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों की बड़ी संख्या पकड़ी गई है, और एटीएस ने कई गिरफ्तारियां भी की हैं।
सीएम योगी ने 3 दिसंबर को 17 नगर निगमों को निर्देश दिए कि सफाईकर्मी, संविदा एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले या अन्य नौकरियों में लगे रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठियों की सूची तैयार करें। यह सूची मंडलीय आयुक्तों और आईजी को सौंपी जाएगी। साथ ही, 18 मंडलों में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने के आदेश दिए गए हैं, जहां घुसपैठियों को रखा जाएगा और निर्वासन तक कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी। नवंबर के अंत में सभी जिलाधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए थे, जिसमें अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाने का भी जिक्र था।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “उत्तर प्रदेश की सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और मजबूत कानून-व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है। रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जाली दस्तावेजों से राज्य में बसने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कल्याणकारी योजनाओं के लाभ गरीबों तक पहुंचाने के लिए भी यह अभियान जरूरी है, क्योंकि संसाधन नागरिकों के हैं, न कि अवैध प्रवासियों के।
प्रशासनिक स्तर पर यह अभियान भावनाओं से प्रेरित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है। घुसपैठियों को न्यायिक उपायों का मौका दिया जाएगा, लेकिन कानून का पालन सुनिश्चित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में अनुमानित 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी और 40 हजार रोहिंग्या प्रवासी हैं, जो सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता को प्रभावित कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में रोहिंग्या मुसलमानों के कानूनी दर्जे पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “घुसपैठियों को लाल कालीन बिछाकर स्वागत नहीं किया जा सकता, जब अपने नागरिक गरीबी से जूझ रहे हैं।”
यूपी में रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सख्ती: CM योगी ने खुद संभाला मोर्चा, बोले- राज्य की सुरक्षा के लिए सफाई जरूरी
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