बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी पर यूपी में हाई अलर्ट, अयोध्या-मथुरा-वाराणसी में सुरक्षा का कड़ा इंतजाम

लखनऊ : 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। अयोध्या, मथुरा और वाराणसी जैसे संवेदनशील जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है, जहां राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि जैसे स्थलों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

ड्रोन निगरानी, वाहन चेकिंग, फुट पेट्रोलिंग और होटलों की स्क्रूटनी के साथ-साथ सादे कपड़ों के जासूसों को भी सक्रिय किया गया है। यह इंतजाम 6 दिसंबर को किसी भी असामाजिक तत्व की करतूत को नाकाम करने के लिए हैं, ताकि शांति भंग न हो।

क्या है पूरा मामला?
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कारसेवकों द्वारा बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने के बाद पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। इस घटना ने दशकों तक विवाद खींचा, जो 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राम मंदिर निर्माण की दिशा में सुलझा। आज राम मंदिर पूर्ण रूप से बन चुका है, लेकिन बरसी पर संवेदनशीलता बरकरार है।

यूपी पुलिस ने गुरुवार से ही तैयारी शुरू कर दी, जिसमें सभी थानों को अलर्ट मोड में रखा गया। अयोध्या एसएसपी गौरव ग्रोवर ने कहा, “सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा, लेकिन आम जनता को असुविधा न हो, इसकी चिंता है।” इसी तरह, मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद को देखते हुए बैरिकेडिंग की गई है।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ, काल भैरव और संकटमोचन हनुमान मंदिरों पर विशेष नजर रखी जा रही है। डीसीपी (क्राइम) सरवनन थगमनी ने बताया, “पूरे शहर में गहन जांच हो रही है, और भीड़ प्रबंधन के लिए अलग टीमें तैनात हैं।” राज्य के अन्य जिलों जैसे लखनऊ, मेरठ, अलीगढ़, आगरा, कानपुर और प्रयागराज में भी पुलिस उपस्थिति बढ़ाई गई है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजारों और सीमाओं पर चेकिंग पॉइंट्स लगाए गए हैं।

प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की टीमें भी तैनात हैं। अयोध्या में गुरुवार से ही अतिरिक्त निगरानी शुरू हो गई, और किसी भी अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मथुरा में सुप्रीम कोर्ट में लंबित विवाद को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।