वाराणसी : उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच एक नया विवाद सामने आया है। समाजवादी पार्टी के स्नातक MLC आशुतोष सिन्हा और उनके परिवार के नाम स्नातक MLC मतदाता सूची से गायब होने का दावा करते हुए पार्टी ने बड़ा आरोप लगाया है। शुक्रवार को सपा का एक प्रतिनिधिमंडल जिला निर्वाचन कार्यालय पहुंचा, जहां अधिकारियों को अवगत कराते हुए तत्काल जांच और दोषी पर कार्रवाई की मांग की गई। यह मामला SIR प्रक्रिया में कथित धांधली को उजागर करता है, जो पूरे राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
आशुतोष सिन्हा, जो वाराणसी से सपा के प्रमुख MLC हैं, ने गुरुवार को सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज की। उन्होंने कहा कि 2003 की आधार सूची से जुड़े स्नातक MLC मतदाता पंजी में उनका नाम, साथ ही पत्नी और अन्य परिवारजन के नाम अनुपस्थित हैं। सिन्हा ने इसे “सिस्टमेटिक फ्रॉड” करार देते हुए बीजेपी सरकार और निर्वाचन तंत्र पर निशाना साधा। उनका दावा है कि यह SIR अभियान के तहत PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वोटरों को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा है।
इसके बाद सपा प्रदेश नेतृत्व ने त्वरित कार्रवाई की। शुक्रवार दोपहर को जिला निर्वाचन कार्यालय में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में स्थानीय सपा नेता, कार्यकर्ता और सिन्हा के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) को ज्ञापन सौंपा, जिसमें नाम बहाली, फॉर्म-6 की तत्काल स्वीकृति और जिम्मेदार BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) पर एक्शन की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि 48 घंटों में समाधान न हुआ, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
SIR अभियान का संदर्भ और व्यापक आरोप
उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों में चल रहे SIR अभियान का मकसद 2003 की आधार सूची को अपडेट करना है, ताकि फर्जी वोटर हटाए जा सकें और नए नाम जोड़े जा सकें। लेकिन सपा ने इसे “वोट चोरी का हथकंडा” बताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। पार्टी
अखिलेश ने कहा, “यह PDA समाज को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश है।” सपा के अनुसार, सीतापुर, बांदा, वाराणसी जैसे जिलों में हजारों नाम गायब हैं, खासकर अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों के। पार्टी ने अपने विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे क्षेत्रों में कैंप लगाकर फॉर्म भरवाएं।
निर्वाचन आयोग और बीजेपी का पक्ष
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया पारदर्शी है और 6 जनवरी 2026 को अंतिम सूची जारी होगी। अभी तक कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई, लेकिन सपा के पत्र पर जांच होगी। BLO फॉर्मों की अनुपलब्धता या देरी को तकनीकी समस्या बताया गया, न कि साजिश।