भोपाल : मध्य प्रदेश में भाजपा के रईस विधायक और खनन कारोबारी संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनकी तीन कंपनियों पर अवैध रेत खनन के आरोपों के बाद शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुल 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये की वसूली का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है।
यह कार्रवाई जबलपुर जिले के सिहोरा तहसील में हुई अतिरिक्त खुदाई की जांच के आधार पर की गई है। कंपनियों को 15 दिनों का समय दिया गया है, अन्यथा संपत्ति कुर्की और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
संजय पाठक विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक हैं और मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों में शुमार हैं। उनके परिवार से जुड़ी तीन खनन कंपनियां—मेसर्स आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, मेसर्स निर्मला मिनरल्स और पेसिफिक एक्सपोर्ट—पर जबलपुर के दुबियारा और घुघरी क्षेत्रों में स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक रेत खनन का आरोप है। खनिज विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों ने लाखों टन अतिरिक्त खुदाई की, जिससे राज्य को भारी राजस्व हानि हुई।
यह विवाद जनवरी 2025 से चल रहा है, जब कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने आर्थिक अपराध विंग (ईओडब्ल्यू) में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर अप्रैल में जांच दल गठित किया गया, जिसकी 6 जून 2025 को सौंपी रिपोर्ट में वसूली राशि तय की गई। रिपोर्ट स्वीकार होने के बाद 10 नवंबर 2025 को जबलपुर कलेक्टर ने कंपनियों को नोटिस जारी किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में विधानसभा में कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा के सवाल पर इसकी पुष्टि की।
हाईकोर्ट में भी घिरी मुश्किलें
संजय पाठक की कंपनियों ने वसूली आदेश को चुनौती देते हुए जून 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन सितंबर 2025 में मामला और उलझ गया, जब हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को केस से अलग कर लिया। जज ने आदेश में लिखा कि पाठक ने फोन पर उनसे मामले पर चर्चा करने की कोशिश की, जो न्यायिक गरिमा के खिलाफ है। इस घटना के बाद पाठक के वकील अंशुमान सिंह सहित चार वकीलों ने केस छोड़ दिया। अब अवमानना का केस चलने की भी संभावना है, जो उनकी विधायकी को खतरे में डाल सकता है।
- मुख्य वसूली: 443 करोड़ रुपये (अतिरिक्त खनन पर पेनल्टी)।
- अतिरिक्त: जीएसटी चोरी पर 80 करोड़ से अधिक की अलग वसूली संभावित।
- कुल प्रभाव: कुछ रिपोर्ट्स में कुल 520 करोड़ तक का उल्लेख, जिसमें ब्याज और अन्य शुल्क शामिल।
खनिज विभाग के अनुसार, नोटिस के बाद कंपनियों ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। यदि 15 दिन में राशि जमा नहीं हुई, तो नियम 216 के तहत संपत्ति जब्ती और ईओडब्ल्यू की गहन जांच होगी। पूर्व मंत्री रह चुके पाठक पर यह पहला बड़ा विवाद नहीं है; पहले भी खनन से जुड़े आरोप लग चुके हैं।