मुंबई : महाराष्ट्र में आज शुक्रवार को शिक्षक संगठनों के आह्वान पर राज्यव्यापी स्कूल बंद आंदोलन हो रहा है। इसकी वजह से करीब 25 हजार सरकारी और निजी स्कूल बंद रहेंगे, जिसमें 9वीं-10वीं कक्षा चलाने वाले 10 हजार से अधिक स्कूल शामिल हैं। यह आंदोलन फरवरी-मार्च 2026 में होने वाली 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले हो रहा है, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ने की आशंका है।
शिक्षक पुरानी पेंशन, टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) की अनिवार्यता हटाने और गैर-शैक्षणिक कामों के बोझ से मुक्ति जैसी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को बंद रखने की सलाह जारी की है, जबकि सरकार से तत्काल वार्ता की मांग हो रही है।
यह आंदोलन महाराष्ट्र राज्य शिक्षण संस्था महामंडल और अन्य शिक्षक-शिक्षकेत्तर संगठनों द्वारा आयोजित है। संगठनों का कहना है कि सरकार की नीतियां शिक्षकों को अतिरिक्त घोषित कर रही हैं, जिससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो रही है। नासिक में आंदोलन के दौरान एक रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर को नकली आईडी घोटाले में गिरफ्तार भी किया गया। अभिभावक और छात्र परेशान हैं, क्योंकि परीक्षा की तैयारी के बीच यह बंदी पढ़ाई को प्रभावित कर सकती है। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि
आंदोलन शांतिपूर्ण रहे।
आंदोलन की मुख्य वजहें:
- टीईटी की अनिवार्यता समाप्त: रिटायरमेंट के करीब शिक्षकों पर भी टीईटी थोपना अनुचित है। संगठन इसे ‘अनावश्यक बोझ’ बता रहे हैं, जो शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
- गैर-शैक्षणिक कामों का अंत: शिक्षकों पर सर्वे, डेटा एंट्री, चुनाव ड्यूटी जैसे 20 से अधिक गैर-शिक्षण कार्यों का बोझ बढ़ रहा है। सरकार नीतिगत बदलाव लाने के बजाय इन्हें और बढ़ा रही है, जिससे कक्षा में समय की कमी हो रही है।
- पुरानी पेंशन स्कीम बहाल: नई पेंशन योजना के खिलाफ पुरानी गारंटीड पेंशन की मांग। इसमें रिवाइज्ड एश्योर्ड प्रोग्रेस स्कीम को लागू करने की अपील शामिल है।
- शिक्षा क्षेत्र में ठेकेदारी बंद: संविदा शिक्षकों की भर्ती रोकना और स्थायी नौकरियां सुनिश्चित करना। पवित्रा पोर्टल पर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप।
- अतिरिक्त शिक्षक घोषणा का विरोध: 9वीं-10वीं वाले 10 हजार स्कूलों में केवल एक शिक्षक रखने की नीति से 18-20 हजार शिक्षक अतिरिक्त हो जाएंगे। इससे 4-5 हजार स्कूलों में 5वीं कक्षा बिना शिक्षक के चलने का खतरा।
संगठन नेता रवींद्र फडणवीस ने कहा, “सरकार आश्वासन देती है, लेकिन मांगें अधर में लटक जाती हैं। परीक्षाओं से पहले ठोस निर्णय लें, वरना आंदोलन और तेज होगा।” यह आंदोलन पिछले साल जुलाई में भी हुआ था, जब अनुदान बढ़ाने की मांग पर दो दिन स्कूल बंद रहे थे।
10वीं बोर्ड परीक्षा पर संभावित असर
महाराष्ट्र माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (MSBSHSE) की 10वीं परीक्षाएं फरवरी 2026 से शुरू होंगी, जबकि प्रायोगिक परीक्षाएं जनवरी से। आंदोलन से छात्रों की तैयारी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मांगें न मानी गईं, तो परीक्षा केंद्रों पर भी असर पड़ सकता है। बोर्ड ने हाल ही में छोटे परीक्षा केंद्रों को बंद करने का फैसला लिया था, जिससे पहले ही विवाद है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि ऑनलाइन क्लासेस या सेल्फ-स्टडी पर फोकस करें।
शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि मांगों पर जल्द बैठक बुलाई जाएगी। विपक्ष ने सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि यह ‘शिक्षा आपदा’ है। आंदोलन नासिक, नागपुर, मुंबई और औरंगाबाद जैसे जिलों में जोरदार है। यदि बातचीत सफल रही, तो आगे के दिनों में स्कूल सामान्य हो सकते हैं।