नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन गुरुवार को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025’ पेश करने की तैयारी की है। यह बिल पान मसाला और अन्य निर्दिष्ट वस्तुओं के उत्पादन पर नया सेस लगाने का प्रावधान करता है, जिसकी आय को सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसी कड़ी में, तंबाकू उत्पादों पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने वाला ‘सेंट्रल एक्साइज बिल, 2025’ पहले ही दोनों सदनों से पारित हो चुका है।
जीएसटी कम्पेंसेशन सेस के समाप्त होने के बाद यह बदलाव तंबाकू और पान मसाला जैसी ‘सिन गुड्स’ पर मौजूदा टैक्स बोझ को बनाए रखेगा, जिससे कीमतों में कोई बड़ा बदलाव न हो, लेकिन स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा मिले। विपक्ष ने बहस की मांग की है, लेकिन सरकार इसे राजस्व तटस्थ कदम बता रही है।
लोकसभा में बिल पेश करने से पहले सीतारमण ने कहा कि यह सेस जीएसटी सेस के खात्मे के बाद राजस्व घाटे को पूरा करेगा। जीएसटी काउंसिल ने सितंबर में फैसला लिया था कि कोविड काल के लोन चुकाने के बाद दिसंबर अंत तक कम्पेंसेशन सेस खत्म हो जाएगा। अब तंबाकू पर 40% जीएसटी के साथ बढ़ी हुई एक्साइज ड्यूटी लगेगी, जबकि पान मसाला पर जीएसटी के अलावा नया सेस। यह बिल मनी बिल के रूप में पेश किया जा रहा है, इसलिए केवल लोकसभा की मंजूरी पर्याप्त होगी। संसद के इस सत्र में कुल 15 बैठकें निर्धारित हैं, जो 19 दिसंबर तक चलेंगी।
बिल के मुख्य प्रावधान और बदलाव
तंबाकू पर बढ़ी एक्साइज ड्यूटी: सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल के तहत सिगरेट, चबाने वाले तंबाकू, हुकाह, जर्दा और अन्य उत्पादों पर ड्यूटी 60-70% तक बढ़ाई जा सकती है। उदाहरण के लिए, अनमैन्युफैक्चर्ड तंबाकू पर 60-70%, सिगार पर 25% या 5,000 रुपये प्रति 1,000 स्टिक्स (जो भी अधिक), सिगरेट पर 2,700-11,000 रुपये प्रति 1,000 स्टिक्स। चबाने वाले तंबाकू पर 100 रुपये प्रति किलो। यह जीएसटी सेस के 28% + अतिरिक्त सेस (कभी-कभी 290% तक) को बदल देगा।
हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस: पान मसाला के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों या प्रक्रियाओं पर सेस लगेगा। फैक्ट्री स्तर पर सेल्फ-डिक्लेरेशन अनिवार्य होगा, और सेस प्रत्येक लोकेशन के लिए अलग-अलग कैलकुलेट होगा। भविष्य में अन्य वस्तुओं को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। आय का इस्तेमाल स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे कैंसर नियंत्रण) और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए होगा।
टैक्स स्ट्रक्चर का नया स्वरूप: जीएसटी स्लैब्स के रेशनलाइजेशन के बाद सिन गुड्स पर 40% जीएसटी + एक्साइज/सेस लगेगा। इससे कुल टैक्स इंसिडेंस वही रहेगा, लेकिन केंद्र को फिस्कल स्पेस मिलेगा।
जीएसटी 2017 से लागू होने के बाद कम्पेंसेशन सेस राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए था, लेकिन अब लोन चुकाने के बाद यह समाप्त हो रहा है। इससे तंबाकू पर टैक्स घट सकता था, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता। सरकार का दावा है कि यह किसानों को तंबाकू की खेती से हटाने में मदद करेगा, उत्पादन और खपत घटाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कैंसर जैसी बीमारियों पर नियंत्रण मजबूत होगा, क्योंकि भारत में तंबाकू से सालाना लाखों मौतें होती हैं।
किसानों पर असर: तंबाकू उत्पादक किसानों और बीड़ी रोलिंग करने वाली महिलाओं की आय प्रभावित हो सकती है। डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने क्षेत्रीय समीक्षा की मांग की।
उद्देश्य की कमी: सेस की आय का स्पष्ट आवंटन स्वास्थ्य योजनाओं के लिए नहीं है, जो इसे ‘एंटी-हेल्थ’ बनाता है। टीएमसी और आप सांसदों ने केंद्र द्वारा सेस फंड के गैर-उपयोग पर सवाल उठाए।
सीतारमण ने स्पष्ट किया कि यह अतिरिक्त टैक्स नहीं, बल्कि मौजूदा बोझ को बनाए रखने का कदम है। उन्होंने कहा, “तंबाकू अभी भी डिमेरिट कैटेगरी में 40% पर टैक्स्ड रहेगा।”