नई दिल्ली, : : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में एक ऐसा ऐलान किया, जो देशभर के करोड़ों वाहन चालकों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। उन्होंने कहा कि अगले एक साल के अंदर मौजूदा टोल बूथ सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। उसकी जगह हाई-टेक बैरियर-फ्री इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम लागू होगा, जिसमें गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
टोल की रकम सीधे बैंक अकाउंट से कट जाएगी। यह कदम न केवल ट्रैफिक जाम से राहत देगा, बल्कि यात्रा के समय को भी आधा कर देगा। गडकरी ने बताया कि यह सिस्टम फिलहाल 10 जगहों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हो चुका है और जल्द ही पूरे देश में फैल जाएगा।
लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रश्नकाल में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गडकरी ने कहा, “टोल के नाम पर आपको कोई नहीं रोकेगा। एक साल के अंदर पूरे देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन लागू हो जाएगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में वर्तमान में 4,500 से अधिक हाईवे प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनकी कुल लागत 10 लाख करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए टोल सिस्टम को डिजिटल और बाधारहित बनाना जरूरी है। यह ऐलान FASTag के बाद टोलिंग में एक क्रांतिकारी बदलाव है, जो 2019 में शुरू हुआ था और अब अगले स्तर पर पहुंच चुका है।
नया बैरियर-फ्री सिस्टम कैसे काम करेगा?
यह नया सिस्टम नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने विकसित किया है। मुख्य फीचर्स इस प्रकार हैं:
- ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR): हाईवे पर लगे कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे। FASTag के RFID टैग के साथ मिलकर यह टोल की गणना करेगा।
- डायरेक्ट डिडक्शन: टोल राशि सीधे लिंक्ड बैंक अकाउंट या वॉलेट से कट जाएगी। कोई रुकावट नहीं, बस गाड़ी चलेगी और पैसे कट जाएंगे।
- डिस्टेंस-बेस्ड चार्जिंग: जितनी दूरी तय करनी है, उतना ही टोल चुकाना पड़ेगा। लोकल यात्रियों के लिए पहले 20 किलोमीटर टोल-फ्री रहेंगे।
- सैटेलाइट इंटीग्रेशन: भविष्य में GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) से जोड़ा जाएगा, जिससे सटीक ट्रैकिंग संभव होगी।
गडकरी ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख हाईवे पर चल रहे हैं। इनसे मिले डेटा के आधार पर सिस्टम को रिफाइन किया जाएगा।
क्यों जरूरी है यह बदलाव? चुनौतियां और फायदे
देश में रोजाना लाखों वाहन हाईवे पर दौड़ते हैं, लेकिन टोल प्लाजा पर जाम की समस्या से यात्रा का आधा समय बर्बाद हो जाता है। गडकरी ने कहा कि मौजूदा सिस्टम पुराना हो चुका है, जहां नकद भुगतान या कार्ड स्वाइप से देरी होती है। FASTag ने तो सुधार किया, लेकिन अब बैरियर-फ्री सिस्टम से 50% तक समय की बचत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और दुर्घटनाओं में गिरावट आएगी।