प्रतापगढ़ में चमत्कारिक सर्जरी: महिला के पेट से निकाला 10 किलो का विशाल ट्यूमर, डॉक्टरों की कुशलता से मिली नई जिंदगी

प्रतापगढ़ : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज क्षेत्र की निवासी 55 वर्षीय सुनीता देवी को पिछले दो वर्षों से पेट में असहनीय दर्द और सूजन की समस्या हो रही थी। शुरू में इसे सामान्य पाचन संबंधी समस्या समझा गया, लेकिन जांच में पता चला कि उनके पेट में एक विशालकाय ट्यूमर विकसित हो चुका था, जिसका वजन करीब 10 किलोग्राम था। जिला अस्पताल के चिकित्सकों की एक कुशल टीम ने जटिल सर्जरी कर इस ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया। सर्जरी के बाद सुनीता की हालत स्थिर है और वे तेजी से रिकवर कर रही हैं। यह घटना स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता का एक जीवंत उदाहरण बनी हुई है।

सुनीता के पति रामप्रकाश ने बताया कि पत्नी की हालत बिगड़ने लगी थी। चलना-फिरना मुश्किल हो गया था, भोजन करने में दिक्कत हो रही थी और लगातार कमजोरी महसूस हो रही थी। ग्रामीण इलाके में रहने के कारण शुरुआत में निजी वैद्यकीय दुकानों पर दवाइयां ली गईं, लेकिन कोई फायदा न होने पर वे जिला अस्पताल पहुंचे। यहां आपातकालीन विभाग में डॉ. अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में जांच शुरू हुई। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन से ट्यूमर की पुष्टि हुई, जो ओवेरियन क्षेत्र में फैला हुआ था। डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी का फैसला लिया, क्योंकि देरी घातक साबित हो सकती थी।

सर्जरी बुधवार को सुबह 8 बजे शुरू हुई और करीब पांच घंटे चली। टीम में डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. रीता वर्मा (स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ. संजय यादव (सर्जन) और निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका मिश्रा शामिल थे। सर्जरी के दौरान ट्यूमर को आसपास के अंगों से अलग करना सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि यह आंतों और मूत्राशय से चिपक चुका था। डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक सभी महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को हटाया। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज को आईसीयू में रखा गया।

सर्जरी की मुख्य चुनौतियां और सफलता के कारक

  • ट्यूमर का आकार और जटिलता: 10 किलोग्राम वजनी यह ट्यूमर बेनाइन (गैर-कैंसरयुक्त) प्रकार का था, लेकिन इसका आकार इतना बड़ा था कि मरीज का वजन 40 किलोग्राम से घटकर मात्र 30 किलोग्राम रह गया था। डॉ. अजय सिंह ने बताया कि ट्यूमर में सिस्टिक फ्लूइड (तरल पदार्थ) जमा हो गया था, जो सूजन का मुख्य कारण था।
  • पूर्व-तैयारी: सर्जरी से पहले मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूजन और पोषण सपोर्ट दिया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सीमित संसाधनों के बावजूद, टीम ने मॉडर्न तकनीकों का सहारा लिया, जैसे लैप्रोस्कोपिक सहायता।
  • रिकवरी प्रक्रिया: सर्जरी के 24 घंटे बाद ही सुनीता सामान्य वार्ड में शिफ्ट हो गईं। डॉक्टरों का कहना है कि दो सप्ताह में वे घर लौट सकेंगी। यह सर्जरी न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि क्षेत्र की महिलाओं के लिए जागरूकता का संदेश भी देती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
डॉ. रीता वर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अक्सर ऐसी समस्याओं को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे मामला जटिल हो जाता है। उन्होंने अपील की कि पेट में सूजन, दर्द या असामान्य वृद्धि होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनय पांडे ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अब जटिल सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है, और मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर भागने की जरूरत नहीं। यह सफलता स्थानीय चिकित्सा टीम के समर्पण का प्रमाण है।