अजमेर दरगाह को बम से उड़ाने की धमकी: सर्च ऑपरेशन में कुछ नहीं मिला, प्रशासन ने सतर्कता बरती

अजमेर : राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की प्रसिद्ध दरगाह शरीफ को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। जिला कलेक्टर के कार्यालय को दोपहर में एक ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें दरगाह के अलावा कलेक्ट्रेट परिसर और स्थानीय परमाणु संयंत्र को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी।

धमकी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और दरगाह को खाली कराकर सघन सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों की कड़ी तलाशी के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली, क्योंकि कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति नहीं मिला। एसपी वंदिता राणा ने कहा, “यह धमकी गंभीर थी, लेकिन जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया।”

धमकी कैसे मिली?: दोपहर करीब 2 बजे जिला कलेक्टर के ईमेल पर एक अज्ञात पते से मैसेज आया। इसमें लिखा था, “दरगाह शरीफ, कलेक्ट्रेट और परमाणु संयंत्र को बम से उड़ा देंगे।” ईमेल की भाषा हिंदी और अंग्रेजी मिश्रित थी, और इसमें आतंकी संगठनों के संकेत दिए गए थे। सूचना मिलते ही कलेक्टर राजेंद्र सिंह ने तत्काल अलर्ट जारी किया।

तुरंत कार्रवाई: एसपी वंदिता राणा के नेतृत्व में एडिशनल एसपी दीपक शर्मा ने डॉग स्क्वॉड, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीएस) और एटीएस टीमों को बुलाया। दरगाह को पूरी तरह खाली कराया गया, जहां हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। कलेक्ट्रेट और परमाणु संयंत्र के आसपास के इलाकों में भी सर्च शुरू हो गया। सर्च ऑपरेशन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चला।

परिणाम: कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। ईमेल की प्रारंभिक जांच में यह फर्जी या मजाक लग रहा है, लेकिन साइबर सेल को ईमेल ट्रेस करने का काम सौंपा गया है। एसपी राणा ने कहा, “हमारी टीमें सतर्क हैं। धमकी देने वाले को जल्द पकड़ेंगे।”

सुरक्षा व्यवस्था: अलर्ट पर अजमेर शहर
यह पहली बार नहीं है जब अजमेर दरगाह को निशाना बनाने की धमकी मिली हो। 2015 में भी रेलवे स्टेशन और दरगाह को पत्र के जरिए धमकी दी गई थी, जिसके बाद सुरक्षा बढ़ाई गई थी। हाल ही में नवंबर 2025 में अजमेर रेलवे स्टेशन पर दादर एक्सप्रेस को बम धमकी मिली थी, जिसमें तीन संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया गया था। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को और सतर्क कर दिया।

श्रद्धालुओं का डर: सामान्य जीवन पटरी पर
धमकी के बाद दरगाह में उमड़ी भीड़ तितर-बितर हो गई। एक श्रद्धालु ने बताया, “अचानक खाली कराया गया, डर लग गया। लेकिन पुलिस की तत्परता से राहत मिली।” सर्च के दौरान लंगर वितरण रुक गया, लेकिन अब सामान्य हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी धमकियां अक्सर फर्जी होती हैं, लेकिन इन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। साइबर क्राइम यूनिट अब ईमेल के आईपी एड्रेस और सेंडर की ट्रैकिंग पर काम कर रही है।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ऐसी धमकियां फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अजमेर पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। यह घटना एक बार फिर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर बहस छेड़ रही है। अपडेट्स के लिए बने रहें।