रामपुर : उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की जिला कारागार में दोहरी पैन कार्ड मामले में सात-सात साल की सजा काट रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान ने बुधवार को परिवार के सदस्यों से मिलने से साफ इनकार कर दिया। जेल पहुंचे परिजनों को करीब एक घंटे इंतजार कराने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा।
इस घटना पर रामपुर जेल प्रशासन ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, जिससे अंदर चल रही व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। सपा समर्थक इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों ने जेल में कैदियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।
घटना का पूरा विवरण: परिवार की उम्मीदों पर पानी
परिवार का दौरा: आजम खान की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा, बहन निकहत अखलाख और बड़े बेटे अदीब आजम खान बुधवार दोपहर रामपुर जेल पहुंचे। उन्होंने मुलाकात के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कीं और जेल प्रशासन को अर्जी सौंपी। परिवार का इरादा कैदियों का हालचाल जानना और कुछ जरूरी बातें करना था।
इनकार का कारण: जेल सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जब आजम खान और अब्दुल्ला को बुलाया गया, तो दोनों ने मुलाकात से साफ मना कर दिया। उन्होंने जेल प्रशासन के “रवैये” को ठीक न बताते हुए कहा कि जब तक व्यवस्था सुधरी नहीं, तब तक कोई मुलाकात नहीं होगी। परिवार को एक घंटे इंतजार कराया गया, लेकिन अंत में उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
पिछले प्रयास: बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार लोग मिलने आ रहे हैं, लेकिन किसी न किसी बहाने मुलाकात रुक जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब आजम परिवार ने ऐसी स्थिति का सामना किया; पहले सितापुर जेल में भी ऐसी घटनाएं हुई थीं।
जेल प्रशासन की खामोशी: सवालों का घेरा
रामपुर जेल अधीक्षक और स्थानीय प्रशासन ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जब पत्रकारों ने संपर्क किया, तो अधिकारियों ने कहा, “यह आंतरिक मामला है, कोई बयान नहीं दिया जा सकता।” सपा कार्यकर्ताओं ने इसे “सुनियोजित साजिश” करार दिया, दावा किया कि जेल में कैदियों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। एक सपा नेता ने कहा, “आजम साहब और अब्दुल्ला को तोड़ने की कोशिश हो रही है, लेकिन वे हार नहीं मानेंगे।” विपक्ष ने मांग की है कि जेल में सीसीटीवी फुटेज की जांच हो और कैदियों के अधिकारों की रक्षा की जाए।
मामला क्या है?: आजम खान और अब्दुल्ला पर दोहरी पैन कार्ड बनाने का आरोप लगा था। 17 नवंबर 2025 को रामपुर की विशेष अदालत ने दोनों को सात-सात साल की सख्त सजा सुनाई। इसके बाद वे रामपुर जेल में बंद हैं। आजम खान पर कुल 70 से अधिक मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें ज्यादातर को उन्होंने राजनीतिक प्रतिशोध बताया है।
परिवार का दर्द: आजम परिवार लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। पत्नी तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला पहले भी जेल जा चुके हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था, “आजम परिवार पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुआ है। बीजेपी गिनीज रिकॉर्ड बना रही है फर्जी केसों का।” अब्दुल्ला को फरवरी 2025 में हरदोई जेल से रिहा किया गया था, लेकिन पैन कार्ड केस ने फिर उन्हें बैर में धकेल दिया।