ग्रेटर नोएडा : उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में निर्माणाधीन जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की साइट से एल्युमिनियम केबल चोरी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो गया है। पुलिस ने टाटा कंपनी के साइट इंजीनियर शिवम शर्मा को मास्टरमाइंड बताते हुए उसके साथ तीन अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया। चोरी की गई लगभग 15 लाख रुपये कीमत की नई केबलें बरामद कर ली गईं। यह घटना एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है, खासकर तब जब हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साइट का निरीक्षण किया था।
चोरी का तरीका: रात के अंधेरे में साजिश
पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह ने रात के समय साइट पर लगी नई एल्युमिनियम केबलें (काले और पीले रंग की मोटी केबलें) चुराईं। इंजीनियर शिवम शर्मा ने अपनी स्थिति का फायदा उठाकर चोरी की योजना बनाई। वह साइट से केबल निकालने का इशारा देता, फिर ड्राइवर इरशाद अहमद और हेल्पर मोहम्मद सिराज कैंटर में लाद लेते। कैंटर पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर सामान को कबाड़ी इजहार उर्फ सोनू के पास बेचा जाता। पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि यह सिलसिला कई दिनों से चल रहा था, और शिवम खुद कार से कैंटर को एस्कॉर्ट करता था ताकि रास्ते में कोई शक न करे।
गिरफ्तारी का ड्रामा: चेकिंग में पकड़े गए
मंगलवार रात इकोटेक-1 थाना पुलिस की रूटीन चेकिंग के दौरान संदिग्ध कैंटर को रोका गया। तलाशी में कैंटर के पीछे 7 बंडल केबलें भरी मिलीं, जिनकी कीमत करीब 15 लाख बताई जा रही है। साथ ही एक स्विफ्ट कार भी बरामद हुई। ड्राइवर इरशाद ने पूछताछ में शिवम का नाम लिया, जिसके बाद पूरा गिरोह फंस गया। एडीसीपी सुधीर कुमार ने बताया, “इंजीनियर की भूमिका सबसे अहम थी। वह साइट पर पहुंच सुनिश्चित करता था।” गिरफ्तारों को कोर्ट में पेश किया गया है, और रिमांड की मांग की गई।
आरोपी कौन-कौन?
- शिवम शर्मा (22): टाटा कंपनी का साइट इंजीनियर, चोरी का ब्रेन।
- इरशाद अहमद (23): कैंटर ड्राइवर, सामान लाने-ले जाने का जिम्मेदार।
- मोहम्मद सिराज (21): हेल्पर, चोरी में हाथ बंटाता।
- इजहार उर्फ सोनू (26): कबाड़ी, चोरी का माल खरीदने वाला।
जांच के नए आयाम: और लोग फंस सकते हैं
पुलिस अब एयरपोर्ट साइट पर तैनात अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। क्या यह गिरोह अकेला था या बड़ा नेटवर्क है? यह सवाल उठ रहे हैं। थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने कहा, “पूछताछ से और खुलासे हो सकते हैं। साइट की सिक्योरिटी को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।” यह घटना जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की तेजी से हो रही प्रगति के बीच सुरक्षा चूक को उजागर करती है, जो 2025 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है।