मोदी-पुतिन की मुलाकात: “हाई डिनर” से मजबूत होगी दोस्ती, अमेरिका-यूरोप की नजरों में खटक रही साझेदारी

नई दिल्ली : : भारत-रूस के बीच ऐतिहासिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पुराने दोस्त पुतिन के सम्मान में लोक कल्याण मार्ग स्थित आधिकारिक आवास पर निजी “हाई डिनर” की मेजबानी करेंगे। यह डिनर जुलाई 2024 में मॉस्को यात्रा के दौरान पुतिन द्वारा किए गए इसी तरह के इशारे का जवाब है।

दोनों नेताओं की गर्मजोशी भरी दोस्ती पर अमेरिका और यूरोप की बुरी नजर पड़ रही है, जहां से भारत पर रूस से तेल खरीद बंद करने का दबाव बढ़ रहा है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को भी मजबूती देगी।

यात्रा का पूरा शेड्यूल: डिनर से शुरू होकर शिखर वार्ता तक
पुतिन की 26-27 घंटे की यह यात्रा 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के रूप में चिह्नित है, जो दोनों देशों के बीच 2000 से चली आ रही “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के 25 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। यहां मुख्य कार्यक्रम:

  • 4 दिसंबर (आज): शाम करीब 4:30 बजे दिल्ली पहुंचने के बाद सीधे पीएम आवास पर निजी डिनर। यह अनौपचारिक बैठक द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श का मंच बनेगी।
  • 5 दिसंबर (कल): सुबह राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत, उसके बाद हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता। दोपहर में वर्किंग लंच और व्यापार मंच। शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा स्टेट बैनक्वेट। पुतिन आरटी (रूसी राज्य प्रसारक) का नया भारत चैनल भी लॉन्च करेंगे।
  • रूसी प्रतिनिधिमंडल में नौ कैबिनेट मंत्री और रोसाटॉम, रोस्कॉसमॉस, रोसनेफ्ट जैसे प्रमुख संस्थानों के अधिकारी शामिल हैं। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की अनुपस्थिति में डिप्टी मंत्री आंद्रेई रूडेंको हिस्सा लेंगे।

मुख्य एजेंडा: रक्षा, व्यापार और ऊर्जा पर फोकस
दोनों नेता रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार 68.72 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो 2020 के 8.1 अरब से कई गुना अधिक है। लक्ष्य: अगले कुछ वर्षों में 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करना।

रक्षा सहयोग: एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम, सु-57 फाइटर जेट और ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल पर बात। रूस से सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति में देरी को दूर करने पर जोर।
ऊर्जा और व्यापार: रूसी तेल की सब्सिडी वाली खरीद को संरक्षित रखने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं में लेन-देन की “आर्किटेक्चर” विकसित करना। भारत के व्यापार घाटे को संतुलित करने के लिए रूसी बाजार में भारतीय निर्यात बढ़ाना।
अन्य मुद्दे: छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों में सहयोग, कुशल श्रमिकों की गतिशीलता और परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं। पुतिन ने कहा, “हम भारत के साथ उतना ही गहरा संबंध चाहते हैं जितना चीन के साथ ‘सीमाहीन’ दोस्ती।”

अमेरिका-यूरोप की “बुरी नजर”: दबाव और चिंताएं
मोदी-पुतिन की दोस्ती पश्चिमी देशों के लिए चुभ रही है, खासकर यूक्रेन युद्ध के बाद। अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाए हैं, जिनमें आधा हिस्सा रूसी तेल खरीद के लिए सजा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत को रूस से तेल खरीद बंद करने के लिए दबाव डाल रहे हैं, ताकि अमेरिकी शेल ऑयल अधिक प्रतिस्पर्धी बने। यूरोपीय देश (जर्मनी, फ्रांस, यूके) ने हाल ही में संयुक्त बयान जारी कर रूस की यूक्रेन नीति की आलोचना की।

वॉशिंगटन की निगरानी: अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि डिनर की गर्मजोशी और रक्षा-ऊर्जा समझौतों पर प्रतिक्रिया निर्भर करेगी। लिसा कर्टिस जैसे विश्लेषकों ने इसे “अमेरिका-भारत संबंधों के लिए नुकसानदायक” बताया।
यूरोप की चिंता: यूक्रेन पर शांति योजना में भारत की भूमिका पर सवाल। पुतिन ने यूरोप को “युद्ध के पक्ष में” बताया, जबकि मोदी यूक्रेन और यूरोपीय चिंताओं को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।