वाराणसी : 4 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश में कोडीन-युक्त नकली कफ सिरप की अवैध तस्करी के बड़े रैकेट में प्रवर्तन निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाया है। एजेंसी ने करीब 100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एफआईआर दर्ज की है। इस केस के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल समेत आठ प्रमुख आरोपी को 8 दिसंबर को ईडी कार्यालय में पेश होने के लिए समन जारी किया गया है।
ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने वाराणसी के प्रह्लाद घाट और सिगरा स्थित शुभम के दो मकानों पर नोटिस चस्पा कर दिए हैं। जांच में पता चला है कि शुभम और उसके साथी फर्जी फर्मों के जरिए नशीले सिरप की तस्करी कर बांग्लादेश और नेपाल भेज रहे थे। इस सिंडिकेट का अनुमानित टर्नओवर 2000 करोड़ रुपये से अधिक का है।
केस का बैकग्राउंड
शुरुआत: मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत के बाद शुरू हुई जांच यूपी के पूर्वांचल तक पहुंची। वाराणसी, जौनपुर, सोनभद्र, गाजियाबाद, लखनऊ समेत कई जिलों में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुईं।
मुख्य आरोपी: शुभम जायसवाल (किंगपिन, दुबई फरार), उसके पिता भोला जायसवाल (गिरफ्तार), अमित सिंह टाटा (गिरफ्तार), बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह (गिरफ्तार), विकास नर्वे (दुबई फरार, तलाश जारी), विभोर राणा, विशाल सिंह, आसिफ, वसीम और सौरभ त्यागी समेत 50 से ज्यादा नाम शामिल।
तस्करी का तरीका: फर्जी फर्म जैसे ‘श्री मेडिकल’ (वाराणसी) और ‘देव कृपा मेडिकल’ (धनबाद) के जरिए सिरप मंगवाया जाता था। माल को फर्नीचर, चावल की बोरी, चूना या चिप्स पैकेट में छिपाकर बांग्लादेश भेजा जाता। शुभम ने अधिकारियों को कट मनी देकर नेटवर्क चलाया।
ईडी की कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज। बैंक खाते, संपत्तियां और वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू। शुभम के परिवार और पार्टनर गौरव जायसवाल व वरुण सिंह भी दुबई में छिपे हैं।
- यूपी एसटीएफ ने अमित सिंह टाटा की गिरफ्तारी के बाद शुभम के दुबई कनेक्शन का खुलासा किया। अमित ने कबूला कि शुभम ने ही फर्जी फर्में बनवाईं। भोला जायसवाल को थाईलैंड भागने की कोशिश में कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा गया।
- शुभम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में गिरफ्तारी से राहत की याचिका दाखिल की, लेकिन ईडी की जांच तेज।
- पूर्वांचल के दो बाहुबलियों और राजनेताओं के संरक्षण का भी पता चला, जिन्हें प्रोटेक्शन मनी मिलती थी।
ईडी ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी समन पर पेश नहीं होते, तो सख्त कार्रवाई होगी। यह रैकेट न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तस्करी का हिस्सा भी। जांच जारी है, और नए नाम उजागर होने की संभावना है।