‘नेहरू सरकारी पैसे से बाबरी मस्जिद बनवाना चाहते थे, लेकिन पटेल ने रोका’: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का सनसनीखेज दावा

नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा जिले के साधली गांव में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर ‘यूनिटी मार्च’ के दौरान एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद (अयोध्या) का निर्माण सरकारी खर्च पर कराना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया और इसे लागू नहीं होने दिया। सिंह ने पटेल को ‘सच्चा धर्मनिरपेक्ष’ बताते हुए नेहरू पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया।

दावे का पूरा विवरण
साधली गांव में आयोजित कार्यक्रम में सिंह ने कहा, “पंडित जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद (अयोध्या) का निर्माण सरकारी पैसे से कराना चाहते थे। लेकिन इसका विरोध करने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल थे। उन्होंने नेहरू के इस प्लान को नाकाम कर दिया।” सिंह ने जोड़ा कि जब नेहरू ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का मुद्दा उठाया, तो पटेल ने स्पष्ट किया कि मंदिर का मामला अलग है, क्योंकि इसके लिए 30 लाख रुपये जनता ने दान में दिए थे। “यह ही असली धर्मनिरपेक्षता है,” सिंह ने पटेल की तारीफ की।

सिंह ने पटेल की विरासत को भी उजागर किया। उन्होंने दावा किया कि पटेल प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन महात्मा गांधी के कहने पर 1946 में अपना नाम वापस ले लिया, जिससे नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष बने। इसके बावजूद विचारधारा के अंतर के चलते पटेल ने नेहरू के साथ काम किया। सिंह ने नेहरू पर पटेल की स्मृति के लिए जनता द्वारा एकत्र धनराशि को कुओं और सड़कों के निर्माण में खर्च करने का सुझाव देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पटेल की विरासत को दबाने की कोशिश की, जबकि नेहरू ने खुद को ‘भारत रत्न’ दिया, लेकिन पटेल के लिए कोई स्मारक नहीं बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाकर पटेल को सच्चा सम्मान दिया।

ऐतिहासिक संदर्भ और पृष्ठभूमि
यह दावा अयोध्या राम मंदिर विवाद के लंबे इतिहास से जुड़ा है। बाबरी मस्जिद 16वीं शताब्दी में मुगल कमांडर मीर बाकी द्वारा बनाई गई थी, जिसे हिंदू पक्ष राम जन्मभूमि मानता है। 1949 में मंदिर के अवशेष मिलने के बाद विवाद बढ़ा। 1992 में कारसेवकों द्वारा मस्जिद ढहा दी गई, जिसके बाद लिबरहान आयोग गठित हुआ। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले से राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।

सिंह का बयान सरदार पटेल की जयंती वर्ष के कार्यक्रम का हिस्सा था, जहां ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (आतंकवाद विरोधी अभियान) को पटेल की दृढ़ता से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर एकीकरण में पटेल का रास्ता अपनाया जाता, तो समस्या न होती।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। बीजेपी समर्थक इसे नेहरू की ‘तुष्टिकरण नीति’ का सबूत बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने इसे ‘इतिहास का विकृतिकरण’ करार दिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया, “सिंह जी के दावे बिना प्रमाण के हैं, पटेल-नेहरू के सहयोग को तोड़ने की कोशिश है।” विपक्ष का कहना है कि यह 2024 लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी की हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करने का प्रयास है।