लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने मंगलवार को शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) 2.0 के तहत बरेली और कानपुर में कुल 582.74 करोड़ रुपये की दो प्रमुख पेयजल परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी गई। इन योजनाओं से लाखों निवासियों को नियमित और शुद्ध पानी की सुविधा मिलेगी, जिससे जलजनित बीमारियों में कमी आएगी और जीवन स्तर सुधरेगा।
परियोजनाओं का विवरण
कैबिनेट बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इन प्रस्तावों की जानकारी साझा की। दोनों योजनाएं केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के संयुक्त निवेश पर आधारित हैं।
यहां मुख्य बिंदु:
बरेली परियोजना: इस योजना के तहत शहर की पुरानी पेयजल व्यवस्था को पूरी तरह नया रूप दिया जाएगा। नई पाइपलाइन, ट्रीटमेंट प्लांट और वितरण नेटवर्क स्थापित होगा, जिससे शहर के अधिकांश इलाकों में 24×7 पानी की आपूर्ति संभव हो सकेगी। इससे करीब 9 लाख लोग लाभान्वित होंगे।
कानपुर परियोजना: कानपुर के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में पाइपलाइन का विस्तार किया जाएगा, ताकि हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचे। यह योजना 33 वार्डों को कवर करेगी और मौजूदा कमी को दूर करेगी।
लाभ और प्रभाव
ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख औद्योगिक शहरों में लंबे समय से चली आ रही पेयजल संकट को हल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल जल की बर्बादी रुकेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुधार भी होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में जोर दिया कि शहरी विकास के लिए बुनियादी सुविधाएं प्राथमिकता हैं। इन योजनाओं के पूरा होने से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
कैबिनेट ने कुल 20 प्रस्तावों पर मुहर लगाई, जिनमें अयोध्या में विश्व स्तरीय मंदिर संग्रहालय और खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के दौरान ड्यूटी का दर्जा देना जैसे अन्य फैसले भी शामिल हैं। कार्यान्वयन के लिए जल शक्ति विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं, और अगले कुछ महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद है।