अमेठी: कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में छात्राओं का थाने के बाहर धरना, 2 टीचर्स पर गंभीर आरोप

अमेठी : उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के शुकुल बाजार स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में छात्राओं ने दो शिक्षिकाओं पर गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए थाने के बाहर धरना दे दिया। छात्राओं का कहना है कि शिक्षिकाएं उन्हें जातिसूचक गालियां देती हैं, नाम कटवाने की धमकी देती हैं और अन्य सहपाठियों को उकसाकर मारपीट करवाती हैं, जिससे वे शांतिपूर्वक पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है।

घटना का विवरण
विद्यालय की छात्राओं, जिनमें नंदिनी सरोज, अंशी शुक्ला, शिवानी, दिव्यांशी, आर्या और रोशनी जैसी कई छात्राएं शामिल हैं, ने बताया कि यह विवाद पहले शिक्षिकाओं और प्रधानाचार्या के बीच चला आ रहा था। हाल ही में हुई जांच के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बाजार शुकुल शैलेंद्र शुक्ला और अमेठी बीईओ ने छात्राओं के बयान दर्ज किए थे। लेकिन इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।

छात्राओं ने आरोप लगाया कि शिक्षिकाएं नीतू श्रीवास्तव और अन्य सहयोगी उन्हें मानसिक प्रताड़ना दे रही हैं। एक छात्रा ने कहा, “हमें जातिसूचक गालियां दी जाती हैं और सहपाठियों को भड़काकर पिटवाया जाता है। हम डर के साए में जी रही हैं।”

पिछले दो दिनों से परिजनों समेत दर्जनों छात्राएं बाजार शुकुल थाने पहुंचीं और थाने के गेट पर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने सड़क जाम कर दी और आरोपी शिक्षिकाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं और अभिभावकों ने नारे लगाए, “न्याय दो, अन्यथा हाईकोर्ट जाएंगे।” थाना प्रभारी और खंड शिक्षा अधिकारी के समझाने पर छात्राएं विद्यालय लौटीं, लेकिन उनका आक्रोश कम नहीं हुआ।

प्रशासन की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने सोमवार को विद्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने तत्काल तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। साथ ही, तनाव कम करने के लिए छह शिक्षिकाओं का स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया गया, जिसमें आरोपी शिक्षिकाएं भी शामिल हैं। बीएसए ने कहा, “छात्राओं की शिकायतों की गहन जांच होगी। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।” जिलाधिकारी अमेठी और पुलिस अधीक्षक ने भी मामले पर नजर रखने का आश्वासन दिया है।

छात्राओं की मांगें

  • आरोपी शिक्षिकाओं के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज हो।
  • विद्यालय में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाए।
  • जांच टीम में बाहरी सदस्य शामिल हों ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
  • छात्राओं को मानसिक सहायता प्रदान की जाए।