नई दिल्ली : लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (LIC) के निवेश फैसलों को लेकर संसद में हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (1 दिसंबर 2025) को लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए साफ कर दिया कि वित्त मंत्रालय LIC को निवेश पर कोई सलाह या निर्देश नहीं देता। यह बयान अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार ने LIC को अडानी ग्रुप में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। आइए, जानते हैं इस विवाद की पूरी डिटेल और मंत्री के बयान के मायने।
मंत्री का बयान: कोई सरकारी दखल नहीं
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा, “वित्त मंत्रालय LIC के फंड्स के निवेश से जुड़े मामलों में कोई एडवाइजरी या डायरेक्शन जारी नहीं करता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि LIC के निवेश फैसले पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं और इन्हें सख्त ड्यू डिलिजेंस, रिस्क असेसमेंट और फिड्यूशरी कंप्लायंस के बाद लिया जाता है।
कानूनी ढांचा: ये निवेश इंश्योरेंस एक्ट 1938, IRDAI, RBI और SEBI के नियमों के तहत होते हैं। सरकार का कोई डायरेक्ट ओवरसाइट नहीं है।
LIC की स्वायत्तता: मंत्री ने स्पष्ट किया कि LIC भारत का सबसे बड़ा इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर है, जिसके पास 41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा एसेट्स हैं। यह 351 लिस्टेड कंपनियों में निवेश करता है, जो हर सेक्टर को कवर करता है।
यह बयान विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब है, जहां कहा जा रहा था कि सरकारी दबाव में LIC ने अडानी ग्रुप में भारी निवेश किया।
अडानी निवेश पर खुलासा: SOPs के तहत, कोई दबाव नहीं मंत्री ने अडानी ग्रुप में LIC के निवेश पर भी विस्तार से जानकारी दी।
- इक्विटी होल्डिंग: 30 सितंबर 2025 तक 38,658.85 करोड़ रुपये।
- डेब्ट इन्वेस्टमेंट: अतिरिक्त 9,625 करोड़ रुपये।
- कुंजी इन्वेस्टमेंट: मई 2025 में अडानी पोर्ट्स एंड SEZ में 5,000 करोड़ रुपये के सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCD) में निवेश, जो बोर्ड-अप्रूvd SOPs के बाद किया गया।
सीतारमण ने कहा, “LIC टॉप 500 NSE-BSE कंपनियों में निवेश करता है, जिसमें ज्यादातर बड़ी कंपनियां शामिल हैं। निफ्टी 50 में LIC का इन्वेस्टमेंट 4,30,776.97 करोड़ रुपये है, जो कुल इक्विटी का 45.85% है।” यह आंकड़े दर्शाते हैं कि LIC का पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाइड है, न कि किसी एक ग्रुप पर केंद्रित।