नई दिल्ली : साइबर धोखाधड़ी और मोबाइल चोरी के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार विभाग ने सभी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि भारत में बिकने वाले हर नए फोन में ‘संचार साथी’ ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए।
यह ऐप यूजर्स को डिलीट या डिसेबल करने का विकल्प नहीं देगा। इसका मकसद साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करना और आम लोगों को फ्रॉड से बचाना है। आइए, जानते हैं इस ऐप की पूरी कहानी और इसके फायदे।
‘संचार साथी’ ऐप क्या है?
‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) एक सरकारी साइबर सिक्योरिटी टूल है, जिसे जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था। यह ऐप दूरसंचार विभाग के तहत काम करता है और मोबाइल यूजर्स की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। अभी तक इसे 5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इसकी मदद से 7 लाख से अधिक खोए या चोरी हुए फोन वापस मिल चुके हैं।
यह ऐप मुख्य रूप से एक नागरिक-केंद्रित प्लेटफॉर्म है, जो टेलीकॉम सिक्योरिटी को बढ़ावा देता है। सरकार का कहना है कि यह साइबर क्रिमिनल्स के गैप्स को बंद करेगा, खासकर क्रॉस-बॉर्डर स्कैम्स में जहां फर्जी IMEI नंबर्स का इस्तेमाल होता है।
सरकार क्यों बना रही है इसे अनिवार्य?
साइबर फ्रॉड पर लगाम: भारत में रोजाना हजारों साइबर ठगी के मामले दर्ज हो रहे हैं। स्कैमर्स फर्जी IMEI (फोन का यूनिक आईडेंटिफायर) का इस्तेमाल कर नेटवर्क का गलत फायदा उठाते हैं। यह ऐप ऐसे फर्जी डिवाइस को ट्रैक और ब्लॉक करने में मदद करता है।
मोबाइल चोरी रोकना: अगर आपका फोन चोरी हो जाए, तो ऐप के जरिए तुरंत ब्लॉक किया जा सकता है। इससे चोर फोन का दुरुपयोग नहीं कर पाते।
फर्जी सिम और कॉल्स की पहचान: ऐप संदिग्ध IMEI रिपोर्ट करने, फ्रॉड कॉल्स की शिकायत दर्ज करने और स्पैम मैसेजेस को फिल्टर करने की सुविधा देता है।
नकली फोन चेक: नया फोन खरीदने से पहले ऐप से IMEI वेरिफाई कर सकते हैं कि डिवाइस असली है या नकली।
DoT ने 28 नवंबर 2025 को यह आदेश जारी किया, जो टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स 2024 के तहत आता है। कंपनियों को 90 दिनों में (मार्च 2026 तक) नए फोन्स में ऐप प्री-इंस्टॉल करना होगा। पुराने स्टॉक के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए ऐप जोड़ना पड़ेगा। कंप्लायंस रिपोर्ट 120 दिनों में फाइल करनी होगी।
साइबर सिक्योरिटी में कैसे मदद करेगा?
तुरंत ब्लॉकिंग: चोरी या खोए फोन को IMEI से ब्लॉक करें, जिससे पुलिस ट्रैकिंग आसान हो।
फ्रॉड अलर्ट: संदिग्ध कॉल्स या मैसेजेस पर रीयल-टाइम अलर्ट। उदाहरण के लिए, ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे स्कैम्स से बचाव।
IMEI वेरिफिकेशन: फोन असली है या क्लोन, यह तुरंत पता चल जाएगा।
स्पैम कंट्रोल: फर्जी सिम कार्ड्स और स्पूफ्ड नंबर्स को रिपोर्ट करें।
डेटा सिक्योरिटी: यूजर डेटा को सुरक्षित रखते हुए नेटवर्क मॉनिटरिंग।
सरकार का दावा है कि यह ऐप ‘मास्टरस्ट्रोक’ है, जो यूजर्स को बॉडीगार्ड की तरह बचाएगा। लेकिन साइबर अपराधी हैकिंग के जरिए पहले सिक्योरिटी ऐप्स डिलीट कर देते हैं, इसलिए इसे अनइंस्टॉलेबल बनाया जा रहा है।
विवाद और चिंताएं
यह फैसला सराहनीय तो है, लेकिन प्राइवेसी को लेकर बहस छिड़ गई है। विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस ने इसे ‘बिग ब्रदर’ मॉडल बताया है। उनका कहना है कि सरकारी ऐप हर फोन में होने से निगरानी बढ़ेगी और यूजर डेटा की गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है। एप्पल जैसी कंपनियां भी प्राइवेसी पॉलिसी का हवाला देकर विरोध कर रही हैं, क्योंकि वे थर्ड-पार्टी ऐप्स को फोर्स नहीं करना चाहतीं।
हालांकि, सरकार का तर्क है कि ऐप सिर्फ सिक्योरिटी के लिए है और कोई पर्सनल डेटा शेयर नहीं होता। DoT ने स्पष्ट किया कि यह यूजर्स की सुरक्षा प्राथमिकता है।