नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भौम प्रदोष व्रत का पालन किया जाता है। इस बार यह व्रत मंगलवार, 2 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। मंगलवार को पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन 3 शुभ योगों का संयोग बन रहा है – रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग। इन योगों से पूजा का फल दोगुना हो जाएगा, और भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति, धन-समृद्धि तथा मोक्ष की प्राप्ति होगी।
भौम प्रदोष व्रत की तिथि और महत्व
तिथि: त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 2 दिसंबर 2025 को दोपहर 3:57 बजे से होगी और 3 दिसंबर को दोपहर 12:25 बजे तक रहेगी। इसलिए व्रत 2 दिसंबर को ही रखा जाएगा।
शुभ योग: रवि योग (सूर्य की विशेष कृपा), सर्वार्थ सिद्धि योग (सभी कार्यों में सफलता) और अमृत सिद्धि योग (अमर फलदायी)। ये योग प्रदोष काल में पूजा को और प्रभावी बनाएंगे।
धार्मिक महत्व: शास्त्रों में कहा गया है कि भौम प्रदोष व्रत से मंगल दोष शांत होता है, शत्रु नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। यह व्रत कर्ज मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ के लिए भी जाना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव पूजा से 21 जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
शिव पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा मुख्य रूप से सूर्यास्त के आसपास के प्रदोष काल में की जाती है। इस बार का शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है
प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:16 बजे तक।
निशीथ काल (वैकल्पिक पूजा): रात 12:15 बजे से 1:05 बजे तक।
सर्वोत्तम समय: सूर्यास्त के ठीक बाद (लगभग 5:45 बजे से 7:00 बजे तक), जब रवि योग चरम पर होगा।
- ये मुहूर्त वैदिक पंचांग पर आधारित हैं।
- पूजा से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद आपको पूजा स्थल को भी स्वच्छ करना चाहिए और वहां गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूरा दिन भर व्रत रखने के बाद प्रदोष काल में आपको विधिपूर्वक शिव जी की पूजा करनी चाहिए।
- शाम की पूजा के दौरान शिव जी को बेलपत्र, फल, फूल आदि आपको अर्पित करने चाहिए। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ और भगवान शिव के मंत्रों का जप करें।
- भोग स्वरूप शिव जी को तिल के लड्डू या फिर मालपुआ आप अर्पित कर सकते हैं। अंत में शिव जी और माता पार्वती की आरती का पाठ आपको करना चाहिए।
- इसके बाद घर के लोगों में प्रसाद का वितरण करना चाहिए और स्वयं भी प्रसाद खाकर व्रत का पारण करना चाहिए। विधिपूर्वक व्रत रखने और शिव जी की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्त आपको होती है। साथ ही भौम प्रदोष व्रत करने सके हर प्रकार के ऋण से आप मुक्त होते हैं।
विशेष टिप्स और लाभ
उपाय: यदि मंगल दोष है, तो 11 बिल्वपत्र शिवलिंग पर चढ़ाएं। काले तिल का दान करें।
लाभ: इन 3 योगों के कारण पूजा से वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति और व्यापारिक उन्नति होगी। विशेष रूप से महिलाओं के लिए सौभाग्यवर्धक।
सावधानी: पूजा में शुद्धता रखें। प्रदूषित जल न छुएं।