पटना: बिहार सरकार ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘हर घर नल का जल’ योजना के तहत सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब अगर कोई व्यक्ति पेयजल का दुरुपयोग करता है, जैसे वाहन धोना, बगीचे में सिंचाई या निर्माण कार्य में इस्तेमाल, तो पहली बार 350 रुपये का जुर्माना, दूसरी बार 400 रुपये और तीसरी बार 5,000 रुपये का भारी जुर्माना लगेगा। इसके बाद पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा। गंभीर मामलों में FIR भी दर्ज की जा सकेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार का यह कदम राज्य में बढ़ती जल संकट की समस्या से निपटने के लिए उठाया गया है।
बिहार में गर्मियों के दौरान पानी की भारी किल्लत देखने को मिलती है। ‘हर घर नल का जल’ योजना 2016 से चल रही है, जो 2.5 करोड़ परिवारों को नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। अब तक 1.5 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन दिए जा चुके हैं, लेकिन दुरुपयोग से संसाधन बर्बाद हो रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह नियम न केवल जल बचत करेगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान वितरण सुनिश्चित करेगा।
- जुर्माने की स्लैब:
- पहली शिकायत: 350 रुपये
- दूसरी शिकायत: 400 रुपये
- तीसरी शिकायत: 5,000 रुपये + कनेक्शन कटौती
FIR का प्रावधान: अगर बर्बादी जानबूझकर हो या बड़े पैमाने पर, तो पुलिस में केस दर्ज होगा। बिहार ग्राउंड वाटर एक्ट 2006 के तहत अतिरिक्त जुर्माना 10,000 रुपये तक और 6 महीने की जेल भी हो सकती है।
लागू करने वाली एजेंसी: जल संसाधन विभाग और स्थानीय पंचायतें/नगर निगम निगरानी करेंगे। शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800-345-6215 जारी किया गया है।
योजना का दायरा और प्रभाव
यह नियम पूरे बिहार में लागू है, खासकर पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर जैसे शहरों में जहां योजना तेजी से फैल रही है। एक वार्ड में औसतन 100-250 घरों को कवर किया जाता है, और आधार कार्ड के आधार पर कनेक्शन दिए जाते हैं। ठेकेदारों को 5 साल तक रखरखाव का जिम्मा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सालाना करोड़ों लीटर पानी की बचत होगी, जो सूखे प्रभावित इलाकों के लिए वरदान साबित होगा।
सरकार की अपील: ‘जल ही जीवन है’
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “पानी का एक-एक बूंद बचाना हमारी जिम्मेदारी है। दुरुपयोग न करें, वरना सख्त कार्रवाई होगी।” विपक्ष ने नियम की सराहना की है, लेकिन लागू करने में पारदर्शिता की मांग की। अब तक योजना से 90% ग्रामीण परिवार लाभान्वित हो चुके हैं, लेकिन शहरी क्षेत्रों में चुनौतियां बरकरार हैं।