कानपुर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का शनिवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। रविवार को भैरवघाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। कनाडा से उनके बड़े बेटे सिद्धार्थ जायसवाल विशेष विमान से सुबह पहुंचे, जिसके बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। राजनीतिक हस्तियों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने उन्हें अंतिम सलाम दिया।
पार्थिव शरीर सुबह 11:30 बजे लालबंगला पोखरपुरवा स्थित उनके आवास से अंतिम यात्रा के लिए रवाना हुआ। यात्रा सबसे पहले कैनाल रोड पर पैतृक निवास पहुंची, जहां परिवार ने भावुक विदाई दी। इसके बाद मेस्टन रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय तिलक हाल में रुकावट ली, जहां देशभर से आए नेता और समर्थक श्रद्धांजलि अर्पित करने उमड़े। अंतिम संस्कार भैरवघाट पर हुआ, जहां तीन राइफल की सलामी देकर राजकीय सम्मान दिया गया।
परिवार की स्थिति: श्रीप्रकाश जायसवाल के दो बेटे सिद्धार्थ (कनाडा निवासी) और गौरव, एक बेटी तथा दो पोते हैं। सिद्धार्थ की उपस्थिति ने परिवार को सांत्वना दी। उनकी पत्नी और बहन रचना (कोलकाता से आईं) भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहीं।
उमड़ी भीड़: यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। अभिनेता रजा मुराद, जो जायसवाल के करीबी थे, ने पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाए और परिवार को सांत्वना दी।
राजनीतिक हस्तियों की श्रद्धांजलि
जायसवाल के निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने तिलक हाल में श्रद्धांजलि दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कानपुर सांसद रमेश अवस्थी, अकबरपुर सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने संवेदनाएं भेजीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे कानपुर के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कहा, “श्रीप्रकाश जी कानपुर के विकास के प्रतीक थे। उनके बिना शहर का एक युग समाप्त हो गया।”
श्रीप्रकाश जायसवाल का राजनीतिक सफर: मेयर से केंद्रीय मंत्री तक
श्रीप्रकाश जायसवाल ने 1989 में कानपुर के महापौर के रूप में राजनीति की शुरुआत की। 1996 से 2004 तक तीन बार लोकसभा सांसद बने। 2004-09 में गृह राज्य मंत्री और 2009-14 में कोयला मंत्री रहे। उन्होंने कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में मजबूत किया, जहां वे प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष भी रहे। कानपुर को फ्लाईओवर, पुल और बेहतर कनेक्टिविटी की सौगात दी, जिससे शहर ‘फ्लाईओवरों का शहर’ बना।