बिहार में करारी हार के बाद महागठबंधन में टेंशन! कांग्रेस में उठी ‘एकला चलो’ की मांग

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन को मिली शर्मनाक हार ने गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच दरारें पैदा कर दी हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को कुल 243 सीटों में से महज 35 मिलीं, जबकि NDA ने 202 सीटों पर कब्जा जमाया। इस हार के बाद कांग्रेस के अंदर ‘एकला चलो’ की नीति अपनाने की मांग तेज हो गई है। दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक में कई नेताओं ने गठबंधन को कमजोरी बताया, तो वहीं RJD ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को मिली हर सीट RJD की देन है। यह विवाद अब महागठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है।

बिहार चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। NDA ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिसमें BJP को 88 सीटें, JDU को मजबूती मिली। दूसरी ओर, महागठबंधन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा:

  • RJD: 143 सीटों पर लड़ी, 25 पर जीती।
  • कांग्रेस: 71 सीटों पर उतरी, सिर्फ 6 पर कामयाब।
  • अन्य सहयोगी: कुल मिलाकर 35 सीटें।

कांग्रेस में ‘एकला चलो’ का शोर: संगठन मजबूत करने का संकल्प
दिल्ली के इंदिरा भवन में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी वाली समीक्षा बैठक में बिहार कांग्रेस के नेताओं ने खुलकर गुस्सा जाहिर किया। कई उम्मीदवारों ने कहा कि RJD से गठबंधन ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अगर अकेले लड़ते, तो परिणाम बेहतर होते। अब ‘एकला चलो’ की नीति अपनाकर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे।”

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने बैठक के बाद कहा, “चर्चा का फोकस संगठन की मजबूती और अनुशासन पर था। हम सभी 243 सीटों पर स्वतंत्र रूप से काम करेंगे।” 1 दिसंबर को पटना में बड़ी बैठक और 14 दिसंबर को दिल्ली में ‘वोट चोरी रैली’ से इस नई रणनीति का आगाज होगा। प्रखंड से प्रदेश स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का प्लान है।

RJD का पलटवार: “कांग्रेस की हर जीत हमारी मेहरबानी”
RJD ने कांग्रेस की मांग पर तीखा तंज कसा। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा, “कांग्रेस को बिहार में जो भी सीटें या वोट मिले, वो RJD की वजह से ही हैं। अगर अलग होना चाहते हैं, तो कोई रोक नहीं। लेकिन याद रखें, उनकी ‘औकात’ हम बिना गठबंधन के तय करते हैं।” तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं ने भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के वोटरों ने RJD को सपोर्ट नहीं किया, जिससे ‘फ्रेंडली फाइट’ वाली सीटें NDA के खाते में गईं।