लखनऊ : उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में 2023 में हुई एक दिल दहला देने वाली वारदात के दोषी को आज फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषी को “आखिरी सांस तक जेल में सड़ने” की सजा देते हुए कहा कि ऐसे हैवान को समाज में रहने का कोई हक नहीं है।
15 मार्च 2023 को श्रावस्ती के एक गांव में 8 साल की मासूम बच्ची लापता हो गई थी। तलाश के दौरान उसका शव पड़ोस के ही एक घर के चूल्हे में मिला। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले थे:
आरोपी रामू उर्फ राम प्रसाद (38 वर्ष), जो पीड़िता का दूर का रिश्तेदार था, ने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया।
वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। जब बच्ची रोने-चिल्लाने लगी और धमकी दी कि वह सब बता देगी, तो आरोपी ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए उसने बच्ची के शव को घर के चूल्हे में डालकर जला दिया।
पुलिस को संदेह हुआ तो आरोपी ने पहले तो इनकार किया, लेकिन जब चूल्हे से बच्ची की अधजली हड्डियां और कपड़े बरामद हुए, तो वह टूट गया और पूरा जुर्म कबूल कर लिया।
श्रावस्ती की POCSO फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज ने आज फैसला सुनाते हुए कहा:
“यह अपराध न सिर्फ एक बच्ची की जिंदगी छीन ले गया, बल्कि पूरी इंसानियत को शर्मसार कर गया। आरोपी ने न सिर्फ दुष्कर्म किया, बल्कि सबूत मिटाने के लिए शव को चूल्हे में जलाया। ऐसे दरिंदे को मृत्युदंड से कम कुछ भी सजा अपर्याप्त है, लेकिन कानूनी प्रावधानों के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास (बिना किसी छूट के) दी जाती है। यह आजीवन कारावास उसकी आखिरी सांस तक चलेगा।”
कोर्ट ने दोषी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो पीड़िता के परिवार को दिया जाएगा। साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया गया कि पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि तुरंत दी जाए।
पुलिस और अभियोजन की तारीफ
अभियोजन पक्ष के वकील ने बताया कि यह केस महज 20 महीने में निपट गया, जो यूपी में POCSO मामलों के लिए रिकॉर्ड समय है। पुलिस ने DNA, फॉरेंसिक और गवाहों के बयानों से केस को इतना मजबूत बनाया कि बचाव पक्ष के पास कोई तर्क नहीं बचा।
पीड़िता की मां ने कोर्ट के बाहर रोते हुए कहा, “मेरी बेटी वापस तो नहीं आएगी, लेकिन आज न्याय मिला। मैं सरकार से बस यही चाहती हूं कि ऐसे हैवानों को फांसी दी जाए।”