नागपुर में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत : मानव को और अच्छा बनाने के लिए हो AI का इस्तेमाल’ भाईचारा ही हमारी परंपरा

नागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को मानव उन्नति का साधन बताते हुए कहा कि इसका उपयोग विवेक और करुणा के साथ करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने भारत की परंपरा पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि “भाईचारा ही हमारी परंपरा है, झगड़ा करना हमारे स्वभाव में नहीं।”

भागवत ने राष्ट्र की अवधारणा को पश्चिमी राष्ट्रवाद से अलग बताते हुए कहा कि भारत हमेशा से सद्भाव और सामूहिकता पर आधारित रहा है। यह बयान RSS की आधुनिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति को दर्शाता है, जहां तकनीक और सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम नागपुर के एक प्रमुख सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें RSS के स्वयंसेवक, बुद्धिजीवी और युवा शामिल थे। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में AI पर कहा, “मानव को और अच्छा बनाने के लिए AI का इस्तेमाल होना चाहिए। यह तकनीक हमें तेजी से आगे ले जा सकती है, लेकिन इसे बिना विवेक के अपनाने से प्रकृति का संतुलन बिगड़ सकता है।” उन्होंने भारतीय मूल्यों पर आधारित AI विकास की वकालत की, ताकि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाए।

भाईचारे पर बोलते हुए भागवत ने जोर दिया, “देश की परंपरा ने हमेशा भाईचारे और सामूहिक सद्भाव पर बल दिया है। विवादों में उलझना भारत का स्वभाव नहीं है।” उन्होंने पश्चिमी राष्ट्रवाद की आलोचना की, जो विभाजनकारी हो सकता है, जबकि भारत की राष्ट्र अवधारणा समावेशी है। कार्यक्रम में ISRO चीफ एस सोमनाथ और अन्य विशेषज्ञ भी मौजूद थे, जिन्होंने भागवत के विचारों का समर्थन किया। सोमनाथ ने AI को अंतरिक्ष अनुसंधान में उपयोग के उदाहरण दिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान RSS की युवा पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश है। लंबे समय से RSS को परंपरागत संगठन माना जाता रहा, लेकिन भागवत के नेतृत्व में यह AI जैसी तकनीकों और सामाजिक सद्भाव पर फोकस कर रहा है। भागवत ने कहा कि “विकास का मतलब आर्थिक प्रगति ही नहीं, बल्कि मानवीय उन्नति है। AI इसमें सहायक बने, तो भारत विश्व गुरु बनेगा।” हाल के महीनों में RSS ने AI वर्कशॉप और डिजिटल ट्रेनिंग शुरू की हैं।

भाईचारे के संदेश को लेकर भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे झगड़ों से दूर रहें और सामूहिकता को मजबूत करें। यह बयान वर्तमान सामाजिक तनावों के बीच शांति का पैगाम देता है।