बस्तर में नक्सलवाद को झटका: विकास नागपुरे उर्फ अनंत समेत 11 हार्डकोर नक्सलियों ने किया सरेंडर

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में शुक्रवार रात पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के पूरे दरेकसा दलम के 11 हार्डकोर नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के प्रमुख कमांडर विकास नागपुरे उर्फ अनंत शामिल हैं, जिनके सिर पर लाखों रुपये का इनाम था।

यह सरेंडर बस्तर और महाराष्ट्र सीमा पर नक्सली गतिविधियों को कमजोर करने का बड़ा संकेत है। सुरक्षा बलों ने हथियारों और गोलाबारूद के साथ इन्हें मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीतियों ने इसे संभव बनाया।

सरेंडर का पूरा घटनाक्रम: PLGA दलम ने कैसे डाला हथियार?
गोंदिया जिले के जिला पुलिस अधीक्षक (DSP) कार्यालय में रात 10 बजे यह सरेंडर समारोह संपन्न हुआ। विकास नागपुरे उर्फ अनंत, जो PLGA के दरेकसा दलम के कमांडर थे, ने अपने पूरे दस्ते को साथ लेकर आत्मसमर्पण का फैसला लिया। नागपुरे पर कई हमलों का आरोप था, और वे बस्तर से सटे महाराष्ट्र के जंगलों में सक्रिय थे। सरेंडर करने वालों में तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के निवासी शामिल हैं।

प्रमुख नक्सलियों के नाम:

  • विनोद सय्यान (40, तेलंगाना के करीमनगर से),
  • पांडु पुसु वड्डे (35),
  • रानी उर्फ रमे येसु नरोटे (30),
  • संतू उर्फ तिजाउराम धरमसहाय पोरेटी (35),
  • शेवंती रायसिंह पंद्रे (32),
  • काशीराम राज्य बंतुला (62),
  • नक्के सुकलू कारा (55),
  • सन्नू मुडियाम (27),
  • सदु पुलाई सोत्ती (30),
  • शीला चमरू माडवी (40),
  • रितु भीमा डोडी (20)।

इन्होंने एसएलआर, इंसास राइफल, थ्री नॉट 3 गन समेत कई हथियार और गोला-बारूद जमा किया। DSP ने बताया, “ये नक्सली लंबे समय से बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रिय थे। सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों और परिवारों की अपील से वे प्रभावित हुए।” सरेंडर के बाद इन्हें चिकित्सा जांच के बाद पुनर्वास केंद्र भेज दिया गया।

क्यों किया सरेंडर? सरकार की नीतियों का असर
नक्सलियों ने सरेंडर के दौरान कहा कि माओवादी संगठन की “झूठी विचारधारा” और लगातार दबाव ने उन्हें मुख्यधारा की ओर लौटने को मजबूर किया। छत्तीसगढ़ सरकार की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस नीति के तहत सरेंडर करने वालों को 50,000 रुपये नकद, जमीन, मकान, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार का मौका मिलता है।

बस्तर रेंज के IG सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा, “पिछले 23 महीनों में 2,200 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। यह नीति हिंसा से विकास की ओर मोड़ रही है।” इसी हफ्ते बस्तर में 10 नक्सलियों (25 लाख इनामी) ने सरेंडर किया था, जो कुल 65 लाख इनामी थे। केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करना है।