रामपुर: सपा नेता आजम खान को विवादित बयान मामले में मिली बड़ी राहत, MP-MLA कोर्ट ने सुनाई बरी होने की सजा

रामपुर : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को एक और कानूनी लड़ाई में बड़ी जीत मिली है। रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व राज्यसभा सांसद अमर सिंह की बेटियों को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के मामले में आजम खान को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में पुलिस की जांच को कमजोर बताते हुए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के भी निर्देश दिए। हालांकि, यह राहत मिलने के बावजूद आजम खान जेल में ही रहेंगे, क्योंकि उन पर अन्य कई आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। सपा कार्यकर्ताओं में इस फैसले से उत्साह है, जबकि भाजपा ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ करार दिया।

मामले का पूरा घटनाक्रम: विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह मामला 2018 का है, जब आजम खान ने जौहर यूनिवर्सिटी (रामपुर) में एक निजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान अमर सिंह की बेटियों के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। अमर सिंह ने इसे महिलाओं के सम्मान पर हमला बताते हुए DGP के आदेश पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में FIR दर्ज कराई, जो बाद में रामपुर के अजीम नगर थाने में स्थानांतरित हो गई। IPC की धारा 504 (जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत केस दर्ज हुआ।

पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया, लेकिन MP-MLA विशेष कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने वीडियो सबूतों की कमी और संदर्भ से बाहर टिप्पणी का हवाला दिया। मंगलवार को दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। आजम खान को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया गया था। शुक्रवार को फैसला आते ही कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका, और निचली अदालत ने बिना साक्ष्य जांच के फैसला दिया था।

कोर्ट का फैसला: बरी लेकिन जेल में ही रहेंगे
MP-MLA मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आजम खान को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। जज ने फैसले में स्पष्ट किया कि बयान का संदर्भ राजनीतिक था, न कि अपमानजनक, और पुलिस ने साक्ष्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया। कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश भी जारी किया। आजम खान ने फैसले के बाद कहा, “मासूम को बेगुनाह साबित होना दुर्लभ है, खासकर जब पुलिस ने केस को तोड़-मरोड़ दिया हो।”

लेकिन यह राहत आजम खान की जेल से रिहाई का कारण नहीं बनेगी। वे रामपुर हिंसा (2019) और अन्य जमीन हड़पने के मामलों में सजा काट रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया है, इसलिए चुनाव लड़ने पर भी रोक बनी हुई है। सपा के एक नेता ने कहा, “यह न्याय की जीत है, लेकिन भाजपा सरकार के दबाव में अन्य केसों को तेजी से निपटाना होगा।”