पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन, लंबे समय से थे बीमार – कानपुर से तीन बार रहे सांसद

कानपुर : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का शुक्रवार देर रात 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे जायसवाल की अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें किदवई नगर के एक नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां से उन्हें कानपुर के लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान रेफर किया गया।

वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से कांग्रेस पार्टी और कानपुर के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। तीन बार कानपुर से सांसद रह चुके जायसवाल को यूपीए सरकार में कोयला और गृह राज्य मंत्री के रूप में जाना जाता था।

कैसे बिगड़ी तबीयत?
श्रीप्रकाश जायसवाल लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से घिरे हुए थे, खासकर हृदय रोग से। परिजनों के अनुसार, शुक्रवार सुबह से ही उनकी हालत नाजुक थी। शाम को पोखरपुर स्थित उनके आवास पर अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई, तो परिवार वाले उन्हें तुरंत नजदीकी नर्सिंग होम ले गए। वहां प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें कार्डियोलॉजी अस्पताल शिफ्ट किया गया, लेकिन डॉक्टरों की सारी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचा नहीं सकें। उनके छोटे भाई प्रमोद जायसवाल ने निधन की पुष्टि की। अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर कानपुर में ही किया जाएगा।

जायसवाल के बेटे गौरव जायसवाल ने बताया कि पिता की हालत पिछले कुछ दिनों से लगातार बिगड़ रही थी। वे राजनीति से सक्रिय रूप से जुड़े रहने के बावजूद घर पर ही अधिक समय बिताते थे।

श्रीप्रकाश जायसवाल का राजनीतिक सफर
25 सितंबर 1944 को कानपुर में जन्मे श्रीप्रकाश जायसवाल ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत स्थानीय स्तर से की। 1989 में वे कानपुर नगर निगम के मेयर बने और 1996 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। लोकसभा चुनावों में उन्होंने 1999, 2004 और 2009 में लगातार तीन बार कानपुर सीट से जीत हासिल की, जो कांग्रेस के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।
यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं:

  • 2004-2009: केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री।
  • 2009-2011: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री।
  • 2011-2014: कोयला मंत्री।

उनके कार्यकाल में कानपुर के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट लाए गए, जैसे गंगा सफाई योजना और औद्योगिक विकास। जायसवाल को ‘कानपुर का सिपाही’ कहा जाता था, क्योंकि उन्होंने शहर की राजनीति को मजबूत आधार दिया। पूर्व कांग्रेसी नेता हर प्रकाश अग्निहोत्री ने कहा, “जायसवाल ने तीन दशकों तक कानपुर को आकार दिया। उनका निधन अपूरणीय क्षति है।”