दिल्ली डेस्क : आज मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा है, जिसे भगवान श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय भी सहस्र गुना फल देते हैं। ज्योतिष और पुराणों के अनुसार इस पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और मां लक्ष्मी स्वयं भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी-लोक में भ्रमण करती हैं। जो भक्त इन सरल उपायों को श्रद्धा से करता है, उसके घर धन-वैभव और सुख-शांति की कभी कमी नहीं होती।
आज जरूर करें ये 7 अचूक उपाय
- चंद्रमा को लक्ष्मी-नारायण अर्घ्य दें
शाम को तुलसी के 11 पत्ते, थोड़ा दूध, गंगाजल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। बोलें –
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, मां लक्ष्मी सहित श्री हरि प्रसन्न होवें।”
यह उपाय धन-आगमन के द्वार खोलता है : - पीपल के पेड़ में दूध-जल अर्पित करें : शाम 5 बजे के बाद पीपल के पेड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और एक चुटकी हल्दी मिलाकर चढ़ाएं। 7 परिक्रमा करें और “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का 11 बार जाप करें। कर्ज और आर्थिक तंगी दूर होती है।
- लक्ष्मी-विष्णु का खीर-केसर का भोग : घर में केसर युक्त खीर बनाएं। उसमें 2 लौंग और थोड़ी मिश्री डालें। पहले भगवान विष्णु-मां लक्ष्मी को भोग लगाएं, फिर प्रसाद पूरे परिवार को बांटें। यह उपाय मां लक्ष्मी को स्थायी रूप से घर में निवास कराता है।
- 11 कौड़ियों का विशेष टोटका : पूजा स्थल पर लाल कपड़े में 11 कौड़ियां, एक सुपारी और थोड़ा सिन्दूर बांधकर रखें। रोज सुबह-शाम “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीबासाय नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें। 41 दिन बाद यह पोटली तिजोरी में रख दें – धन में निरंतर वृद्धि होती है।
सफेद फूलों की माला से पूजा ; आज भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को सफेद या पीले फूलों की माला चढ़ाएं। कम से कम 108 बार “ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र बोलें। विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और गृहस्थ जीवन सुखमय बनता है। - शनि-राहु के दोष से मुक्ति का उपाय : पूर्णिमा की रात में एक नारियल पर लाल चंदन से “राम” लिखकर बहते जल में प्रवाहित करें। इससे शनि-राहु के कारण आ रही धन-हानि रुक जाती है।
दान का विशेष महत्व - आज सफेद वस्तु (चावल, दूध, दही, चीनी, सफेद कपड़ा) किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान करें। दान करते समय बोलें – “मां लक्ष्मी मेरे घर में सदा निवास करें।” यह दान सौ गुना फल देता है।
आज का शुभ मुहूर्त
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 27 नवंबर शाम 5:34 बजे से
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 28 नवंबर शाम 6:58 बजे तक
- चंद्रोदय: शाम 5:42 बजे (लगभग सभी शहरों में)
- ब्रह्म मुहूर्त पूजा: सुबह 4:30 से 5:30 बजे तक