लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए आधार कार्ड को जन्मतिथि प्रमाण पत्र के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और संस्थानों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अब आधार कार्ड को जन्म प्रमाण के तौर पर न मानें।
यह कदम UIDAI (यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की दिशा-निर्देशों के अनुरूप है, जो स्पष्ट करता है कि आधार केवल पहचान पत्र के रूप में वैध है, न कि जन्मतिथि या उम्र के प्रमाण के रूप में। इस फैसले से लाखों लोगों को अब जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या शैक्षिक प्रमाणपत्र जैसे वैकल्पिक दस्तावेज जुटाने पड़ेंगे।
मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने 27 नवंबर को सभी विभागाध्यक्षों को एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें कहा गया है कि आधार कार्ड में जन्मतिथि का कोई आधिकारिक प्रमाण अटैच नहीं होता। UIDAI ने 2023 से ही स्पष्ट किया है कि आधार का उपयोग केवल पहचान स्थापित करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन जन्मतिथि सत्यापन के लिए यह पर्याप्त नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में एक मामले में इसकी पुष्टि की, जहां मोटर एक्सीडेंट क्लेम में आधार को उम्र प्रमाण न मानते हुए स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट को प्राथमिकता दी गई।
सर्कुलर के अनुसार, अब सभी सेवाओं जैसे पेंशन, नौकरी आवेदन, शादी-पंजीकरण, वोटर आईडी अपडेट और अन्य योजनाओं में जन्मतिथि के लिए वैध दस्तावेज अनिवार्य होंगे। वैकल्पिक प्रमाणों में जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या अस्पताल का सर्टिफिकेट शामिल हैं। यदि कोई व्यक्ति इनमें से कोई दस्तावेज न जुटा पाए, तो संबंधित विभागों को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, और विभागों को 15 दिनों के अंदर अपनी वेबसाइट्स, फॉर्म और प्रक्रियाओं को अपडेट करने का आदेश दिया गया है। गलत प्रमाण प्रस्तुत करने पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।