भोपाल : SIR घोटाले के खिलाफ युवा कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन: पुलिस ने वाटर कैनन और लाठीचार्ज किया

भोपाल : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सड़कों पर गुरुवार को सियासी तूफान आ गया। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ‘वोट चोरी’ और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया। लेकिन जैसे ही वे मार्च निकालकर पॉलिटेक्निक चौराहे की ओर बढ़े, पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया। विरोध बढ़ते ही पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की तेज बौछार छोड़ी और लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें कई कार्यकर्ता घायल हो गए। यह प्रदर्शन कांग्रेस के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान का हिस्सा है, जो केंद्र और राज्य सरकार पर वोटर लिस्ट से गरीब-दलित वोटरों के नाम काटने का आरोप लगा रहा है।
प्रदर्शन का पूरा घटनाक्रम
भोपाल के कांग्रेस मुख्यालय में नवनिर्वाचित युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने पदभार संभालते ही कार्यकर्ताओं को SIR के खिलाफ सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। सुबह 11 बजे रोशनपुरा चौराहे से शुरू हुआ मार्च धीरे-धीरे उग्र होता चला गया। हाथों में बैनर-पोस्टर थामे सैकड़ों युवा ‘वोट चोरी बंद करो’, ‘गरीबों के वोट मत काटो’ और ‘चुनाव आयोग बिक गया’ जैसे नारे लगाते हुए चुनाव आयोग की ओर बढ़े।

व्यापम चौराहे पर पहुंचते ही पुलिस ने तीन स्तरीय बैरिकेडिंग लगा दी। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने पहला हमला वाटर कैनन से किया। पानी की बौछारों से भीड़ तितर-बितर होने लगी, लेकिन कुछ युवा चौराहे पर ही धरने पर बैठ गए। स्थिति बिगड़ते ही लाठीचार्ज शुरू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धक्का-मुक्की में 10-12 कार्यकर्ता चोटिल हुए, जिन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने करीब 20-25 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया।

घनघोरिया ने कहा, “SIR के नाम पर भाजपा वोट चुरा रही है। राहुल गांधी जी ने हरियाणा में इसका सबूत दिया था, अब मध्य प्रदेश में भी यही हो रहा है। हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि कार्यकर्ता भीड़ में नारे लगाते हुए पुलिस पर पानी की बौछारों का सामना कर रहे थे।

SIR विवाद क्या है? क्यों भड़का कांग्रेस का गुस्सा?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, एक ऐसी प्रक्रिया है जो चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में चलाई है, जिसमें वोटर लिस्ट को अपडेट करने के नाम पर नाम काटे जा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि BLO पर दबाव डालकर गरीब, दलित और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, ताकि भाजपा को फायदा हो। राहुल गांधी ने हाल ही में हरियाणा चुनाव में इसकी मिसाल दी थी, जहां कथित तौर पर 20 लाख वोटरों के नाम गायब हो गए।

मध्य प्रदेश में भी यही सिलसिला चल रहा है। युवा कांग्रेस का दावा है कि भोपाल जिले में ही हजारों नाम काटे गए हैं, जो आगामी लोकसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है। विपक्षी दल इसे ‘संवैधानिक साजिश’ बता रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि यह रूटीन प्रक्रिया है और नाम काटना फर्जी वोटरों को रोकने के लिए है। लेकिन कांग्रेस इसे ‘वोट चोरी का हथियार’ मान रही है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा, “युवाओं का गुस्सा जायज है। भाजपा सरकार लोकतंत्र को कुचल रही है।” पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसे ‘चुनावी षड्यंत्र’ बताया। दूसरी ओर, भाजपा ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन उनके प्रवक्ता ने इसे ‘कांग्रेस की हार का रोना’ कहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन आगामी चुनावों से पहले विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है।