नई दिल्ली – भारतीय रेलवे के ट्रेनों और स्टेशनों पर केवल हलाल प्रमाणित मीट परोसने के आरोपों ने मानवाधिकारों के सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मंगलवार को रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया है, जिसमें शिकायत को गंभीर मानते हुए 2 हफ्ते के अंदर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी गई है। आयोग का कहना है कि यह प्रथा प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों का उल्लंघन है, जो हिंदू अनुसूचित जाति समुदायों और अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों की आजीविका को प्रभावित करती है। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और पेशे की आजादी जैसे संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
शिकायतकर्ता सुनील अहीरवार ने भोपाल से NHRC को आवेदन देकर आरोप लगाया कि रेलवे और IRCTC द्वारा संचालित कैटरिंग सेवाओं में नॉन-वेज भोजन में केवल हलाल तरीके से काटा गया मीट इस्तेमाल किया जाता है। इससे हिंदू और सिख यात्री अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भोजन विकल्पों से वंचित हो जाते हैं, जो अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव निषेध), 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता), 21 (जीवन का अधिकार) और 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन है। शिकायत में ओल्गा टेलिस (1985), इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन (2018), स्टेट ऑफ कर्नाटक बनाम अप्पा बалу इंगले (1995) और NHRC बनाम गुजरात राज्य (2009) जैसे ऐतिहासिक
मामलों का हवाला दिया गया है।
NHRC की बेंच, सदस्य प्रियांक कनौंगो की अध्यक्षता में, ने शिकायत को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान में लिया। आयोग ने कहा कि केवल हलाल मीट की बिक्री से मीट व्यापार में लगे अनुसूचित जाति हिंदू समुदायों और अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित होती है।
रेलवे, एक सरकारी संस्था होने के नाते, संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप सभी धर्मों के लोगों के खाद्य विकल्पों का सम्मान करना चाहिए। आयोग ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को निर्देश दिए कि आरोपों की जांच कराई जाए और 2 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपी जाए।
यह मुद्दा पहले भी कई बार उठ चुका है। IRCTC ने स्पष्ट किया है कि हलाल प्रमाणन अनिवार्य नहीं है और विभिन्न समुदायों के ठेकेदारों को अवसर दिए जाते हैं। लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि व्यवहार में अधिकांश सप्लायर्स हलाल प्रमाणित हैं। हाल ही में सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) के समक्ष भी RTI के जरिए यह सवाल उठा था, जहां रेलवे ने कहा कि ट्रेनों में हलाल प्रमाणित भोजन परोसने का कोई आधिकारिक प्रावधान नहीं है।
रेलवे की प्रतिक्रिया: कोई अनिवार्यता नहीं
रेलवे बोर्ड ने बुधवार को NHRC के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रेनों में हलाल प्रमाणित भोजन बेचने का कोई आधिकारिक प्रावधान नहीं है। बोर्ड अधिकारियों ने बताया कि कैटरिंग ठेकेदारों को गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों का पालन करना होता है, लेकिन हलाल सर्टिफिकेशन पर कोई जबरदस्ती नहीं। फिर भी, NHRC की जांच से यह स्पष्ट होगा कि क्या व्यावहारिक स्तर पर कोई भेदभाव हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद रेलवे की कैटरिंग नीति की समीक्षा का अवसर है, जहां यात्री पसंद के अनुसार विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।
यह मामला रेलवे की खाद्य सेवाओं में पारदर्शिता और समावेशिता पर बहस छेड़ सकता है। NHRC की रिपोर्ट के आधार पर यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो नीतिगत बदलाव संभव हैं। यात्रियों के अधिकारों के साथ-साथ सप्लाई चेन में छोटे व्यापारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए। रेलवे ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन आयोग की समयसीमा के अंदर जवाब देना होगा।
रेलवे में ‘हलाल मीट’ पर विवाद: NHRC ने रेलवे बोर्ड को जारी किया नोटिस, 2 हफ्ते में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
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