नई दिल्ली : संविधान दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी नागरिकों को एक हृदयस्पर्शी पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने संविधान के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और आस्था के अनुभव साझा किए। यह पत्र, जो ‘हमारा संविधान-हमारा सम्मान’ अभियान का हिस्सा है, लाखों लोगों तक पहुंचा और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पीएम ने इसे “हमारे लोकतंत्र का आधार स्तंभ” बताते हुए कहा कि संविधान न सिर्फ अधिकार देता है, बल्कि कर्तव्यों की याद भी दिलाता है।
पत्र की शुरुआत में पीएम मोदी ने डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान सभा के सदस्यों को नमन किया। उन्होंने लिखा, “मैं बाबासाहेब आंबेडकर और संविधान निर्माताओं के चरणों में वंदन करता हूं, जिन्होंने आधुनिक भारत का सपना देखा। संविधान हमारा मार्गदर्शक प्रकाश है, जो मानव गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे के मूल्यों पर टिका है।”
पीएम ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि गुजरात के एक छोटे से गांव में बचपन से ही संविधान की शिक्षाओं ने उन्हें प्रेरित किया। “जब मैं चाय की दुकान पर काम करता था, तब भी संविधान की भावना – न्याय, स्वतंत्रता और समान अवसर – मेरे मन में बस गई थी। आज जब मैं देश का सेवक हूं, तो यह श्रद्धा और मजबूत हो गई है।”
पत्र की मुख्य बातें:
कर्तव्यों पर जोर: पीएम ने कहा, “संविधान हमें अधिकार देता है, लेकिन कर्तव्य हमें मजबूत बनाते हैं। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हर नागरिक को मतदान का अधिकार निभाना चाहिए। स्कूलों में पहली बार वोट डालने वाले युवाओं का उत्सव मनाएं।”
75 वर्षों का सफर: 26 नवंबर 1949 को अपनाए गए संविधान के 76 वर्ष पूरे होने पर पीएम ने इसे “हमारी सभ्यता की विरासत” बताया। उन्होंने लिखा, “यह दस्तावेज न सिर्फ कानून है, बल्कि हमारी एकता का प्रतीक है। आइए, हम सभी प्रीअंबल को पढ़ें और वीडियो शेयर करें, ताकि युवा पीढ़ी इसमें निहित गौरव महसूस करे।”
आज की प्रासंगिकता: पत्र में पीएम ने उल्लेख किया कि संविधान की भावना ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत बनाया है। “26/11 के दर्द को याद करते हुए, संविधान हमें सत्य और सरलता का पाठ पढ़ाता है। राज्य का कर्तव्य है जनता को सुखी रखना।”
देशव्यापी अभियान का हिस्सा:
यह पत्र ‘हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान’ अभियान के दूसरे चरण का हिस्सा है, जो जनवरी 2025 से शुरू हुआ। पीएम ने नागरिकों से अपील की कि वे संविधान की मूल भावना को अपनाएं और सामाजिक न्याय के लिए योगदान दें। सुप्रीम कोर्ट में आयोजित मुख्य समारोह में पीएम, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भाग लिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, “न्याय और समानता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराएं।”
पीएम मोदी का यह पत्र साबित करता है कि संविधान सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवंत प्रेरणा है। आइए, हम सब मिलकर इसे मजबूत बनाएं। जय हिंद, जय संविधान!