अयोध्या राम मंदिर: PM मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत ने की रामलला की आरती, अभिजीत मुहूर्त में लहराया भगवा धर्म ध्वज

अयोध्या : विवाह पंचमी के पावन पर्व पर अयोध्या धाम में एक ऐतिहासिक क्षण का साक्ष्य बना, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के 161 फीट ऊंचे मुख्य शिखर पर भगवा धर्म ध्वज फहराया। RSS प्रमुख मोहन भागवत के साथ पीएम मोदी ने रामलला की आरती की और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान संपन्न कराया।

अभिजीत मुहूर्त (11:52 से 12:35 बजे) में हुए इस ध्वजारोहण ने सदियों पुराने संघर्ष को समर्पण का प्रतीक बना दिया। लगभग 7,000 आमंत्रित अतिथियों, संतों और निर्माणकर्ताओं की मौजूदगी में जय श्री राम के उद्घोष से रामनगरी गूंज उठी। यह मंदिर निर्माण की पूर्णता का संदेश है, जो राष्ट्रीय एकता और रामराज्य के आदर्शों को मजबूत करता है।

पीएम मोदी सुबह 10 बजे अयोध्या पहुंचे, जहां उनका स्वागत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया।

उनका विस्तृत शेड्यूल इस प्रकार रहा:

  • 10:30 बजे: शेषावतार मंदिर में पूजा।
  • 11:00 बजे: माता अन्नपूर्णा मंदिर में आरती।
  • 11:30 बजे: राम दरबार गर्भगृह में मंत्रोच्चार के साथ पूजा, उसके बाद रामलला गर्भगृह में दर्शन।
  • 12:00 बजे: अभिजीत मुहूर्त में पीएम मोदी ने बटन दबाकर 11 किलोग्राम वजनी भगवा ध्वज फहराया। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने सहभागिता की, जबकि 108 आचार्यों ने वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराया।
  • आरती का क्षण: पीएम मोदी और मोहन भागवत ने रामलला की संयुक्त आरती की, जो भक्ति का संगम बनी। अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और शंखनाद गूंजा।
  • उसके बाद: पीएम ने निर्माणकर्ताओं (इंजीनियर, कारीगर, मजदूर) से मुलाकात की। सीएम योगी ने पीएम को धर्म ध्वजा और रामलला की लघु मूर्ति भेंट की।

पीएम मोदी ने संबोधन में कहा, “यह ध्वज सदियों के सपने का साकार होना है। राम मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी।” मोहन भागवत ने इसे “राम श्रद्धा और सांस्कृतिक जागरण का अनुपम संगम” बताया।
धर्म ध्वज का विशेष महत्व: त्याग और समर्पण का प्रतीक

डिजाइन: 10 फीट ऊंचा, 20 फीट लंबा त्रिकोणाकार भगवा ध्वज, अहमदाबाद के कारीगरों द्वारा पैराशूट नायलॉन और रेशम से तैयार। इसमें सूर्य (राम की तेजस्विता), ‘ॐ’ और कोविदार वृक्ष (त्याग का प्रतीक) अंकित हैं।

मजबूती: 200 किमी/घंटा हवा का सामना कर सकता है, जो सूर्यवंश की अमरता का संदेश देता है।

धार्मिक महत्व: विवाह पंचमी पर फहराया गया यह ध्वज राम-सीता के विवाह का स्मरण कराता है, और मंदिर को पूर्ण रूप प्रदान करता है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रेजरर गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा, “5 सदियों बाद यह दिन आया।”

मंदिर परिसर (2.7 एकड़) में 14 सहायक मंदिर (हनुमान, गणेश आदि) सजे हुए थे, जहां भक्तों ने भक्ति में डूबे रहे।

सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था: भारी भीड़ के बीच सतर्कता

सुरक्षा: 7-स्तरीय कवच, एसपीजी, एनएसजी, ATS और 1,000 पुलिसकर्मी तैनात। शहर को प्रतिबंधित जोन में बांटा गया, ड्रोन उड़ान प्रतिबंधित। 40 प्राइवेट जेट्स से अतिथि पहुंचे।

दर्शन: 25 नवंबर को सुबह से दोपहर 2:30 बजे तक बंद (केवल आमंत्रितों के लिए)। उसके बाद सामान्य दर्शन शुरू, लेकिन भारी भीड़ के कारण रात तक चला। 26 नवंबर से सामान्य समय बहाल।

ट्रैफिक: डायवर्जन जारी, पार्किंग सीमित। 1,800 कमरों वाले होटल-होमस्टे में अतिथियों का ठहराव। 8 स्थानों पर भोजन प्रसाद की व्यवस्था।