कोलकाता : पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में अब तक 10.33 लाख से अधिक गणना फॉर्म जमा नहीं हो सके हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि ये फॉर्म मुख्य रूप से अनुपस्थित, डुप्लिकेट, मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़े हैं।
ऐसे में इन 10 लाख नामों को मतदाता सूची से हटाए जाने का संकेत मिला है, जो आगामी विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित करने का प्रयास है। SIR अभियान 4 नवंबर से शुरू हुआ है, और अब तक BLOs (बूथ लेवल ऑफिसर्स) ने 7 करोड़ से अधिक मतदाताओं तक पहुंच बनाई है, लेकिन चुनौतियां बरकरार हैं।
SIR प्रक्रिया: क्या है चुनौती?
अनकलेक्टेबल फॉर्म्स: CEO के अनुसार, कुल 7.64 करोड़ SIR फॉर्म वितरित किए गए, जिनमें से 4.55 करोड़ का संग्रह और डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। बाकी 1.35% (लगभग 10.33 लाख) फॉर्म ‘अनकलेक्टेबल’ यानी जमा न हो सकने वाले हैं। इनमें ज्यादातर मामले अनुपस्थित मतदाता (घर खाली मिलना), डुप्लिकेट एंट्री, मृत व्यक्ति या दूसरे राज्य में शिफ्ट हो चुके वोटरों के हैं।
मृत मतदाताओं की संख्या: चुनाव आयोग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शुरुआती आंकड़ों में 6 से 6.5 लाख नाम ऐसे हैं जो वर्षों पहले मृत हो चुके हैं। बाकी डुप्लिकेट या ट्रेस न हो सकने वाले हैं।
BLOs की मेहनत: CEO ने BLOs की तारीफ की, जिन्होंने 20 दिनों में 7 करोड़ घरों का दौरा किया। राज्य में 80,600 BLOs, 8,000 सुपरवाइजर और 294 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स तैनात हैं। हालांकि, BLOs पर काम का बोझ बढ़ने से कुछ शिकायतें भी आई हैं।
यह प्रक्रिया तीन चरणों में चल रही है, जो मार्च 2026 तक पूरी होगी। आयोग का लक्ष्य फर्जी वोटरों को हटाकर वास्तविक मतदाता संख्या को सटीक बनाना है। 2002 की पुरानी सूची से तुलना में वर्तमान लिस्ट में केवल 32% नाम मैच कर रहे हैं, जो SIR की जरूरत को रेखांकित करता है।
कैसे तय होता है नाम कटना?: अगर BLO तीन बार घर पर जाकर मतदाता को न पा सके या फॉर्म जमा न हो, तो नाम को संदिग्ध माना जाता है। मृत, डुप्लिकेट या स्थानांतरित साबित होने पर नाम हटाया जा सकता है। हालांकि, अगर 2003 की सूची में नाम है, तो
केवल फॉर्म भरना काफी है – कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं।
अलग सूची का ऐलान: चुनाव आयोग 9 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची जारी करने से पहले ‘अधूरे फॉर्म्स’ की अलग सूची प्रकाशित करेगा। इसमें मृत, फर्जी या स्थानांतरित नाम शामिल होंगे। वैध मतदाताओं को नाम कटने पर अपील का मौका मिलेगा।
राजनीतिक विवाद: विपक्षी दल बीजेपी ने सीमावर्ती जिलों (जैसे उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद) में फर्जी वोटरों की शिकायत की है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि वैध नाम कटने पर विरोध प्रदर्शन होंगे। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि किसी चूक पर अधिकारी जवाबदेह होंगे।