नई दिल्ली : भारतीय न्यायपालिका को आज नया प्रमुख मिल गया। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस सूर्यकांत को 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ दिलाई गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय राजधानी स्थित राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में उन्हें शपथ ग्रहण कराई। यह समारोह संक्षिप्त लेकिन गरिमामय रहा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई जज तथा वैश्विक न्यायिक हस्तियां उपस्थित रहीं। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा, जो 9 फरवरी 2027 को उनकी सेवानिवृत्ति (65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर) तक चलेगा।
शपथ ग्रहण समारोह
राष्ट्रपति मुर्मु ने संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत जस्टिस सूर्यकांत को शपथ दिलाई, जिसमें उन्होंने देश के प्रति निष्ठा, न्यायपूर्ण फैसले और संविधान की रक्षा का संकल्प लिया। समारोह में पूर्व CJI जस्टिस बी.आर. गवई भी मौजूद थे, जिनके स्थान पर जस्टिस सूर्यकांत ने पदभार संभाला। यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट की परंपरा के अनुरूप हुई, जहां सीनियरमोस्ट जज को ही अगला CJI बनाया जाता है। केवल दो बार इस परंपरा का उल्लंघन हुआ था—1973 में जस्टिस ए.एन. रे और 1977 में जस्टिस एम.एच. बेग की नियुक्ति में।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधिमंडल ने भी शिरकत की, जो भारत की न्यायिक प्रणाली की वैश्विक प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, “जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व में न्यायपालिका नई ऊंचाइयों को छुएगी।”
जस्टिस सूर्यकांत का सफर
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 1958 में हरियाणा के कैथल में हुआ। उन्होंने 1980 में हरियाणा में वकालत शुरू की और 2004 में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने। 5 अक्टूबर 2018 को वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने, और 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में ऊंचे पद पर पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल कई ऐतिहासिक फैसलों से चमका।
- अनुच्छेद 370 हटाना: जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति समाप्त करने वाले ऐतिहासिक फैसले में प्रमुख भूमिका।
- चुनावी पारदर्शिता: राजनीतिक दलों के लिए आयकर छूट पर सवाल उठाते हुए वित्त विधेयक को चुनौती दी।
- जेंडर बायस: कानूनों में लिंग भेदभाव को चुनौती देने वाले मामलों में सक्रिय।
- वन रैंक वन पेंशन: सशस्त्र बलों के लिए इस योजना को लागू करने के फैसले में योगदान।
- एएमयू अल्पसंख्यक दर्जा: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुनवाई।
- पेगासस जासूसी: सरकारी निगरानी पर फैसले में शामिल।
15 महीनों का एजेंडा: लंबित मामलों पर जोर, AI का न्याय में उपयोग
नए CJI ने शपथ के बाद कहा, “न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखना मेरा प्राथमिक कर्तव्य होगा।” उनके कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में 80,000 से अधिक लंबित मामलों को कम करने पर फोकस होगा। ट्रायल अवधि छोटी करने, मुकदमेबाजी को सस्ता बनाने और न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल करने की योजना है। विशेष रूप से, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के न्यायिक निर्णयों में उपयोग पर ध्यान दिया जाएगा, जहां LLM (लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स) की भूमिका पर विचार-विमर्श होगा।