लखनऊ: भागवत-योगी ने एक मंच पर दिया हिंदुत्व का खुला ऐलान, 2027 से पहले RSS-BJP का मेगा संदेश!

यूपी : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ कार्यक्रम ने सनातन संस्कृति की धारा को नई गति दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संयुक्त उपस्थिति ने हिंदुत्व के एजेंडे को मजबूती प्रदान की। जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में दोनों नेताओं के भाषणों से साफ संकेत मिले कि सनातनी चेतना को जागृत करने और ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा को मजबूत बनाने का संकल्प अटल है। यह आयोजन गीता जयंती 2026 की तैयारियों का हिस्सा था, जहां हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए।

भागवत-योगी की मुलाकात: सांस्कृतिक पुनरुत्थान का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत में RSS प्रमुख मोहन भागवत और सीएम योगी ने एक-दूसरे का स्वागत किया, जो सनातन मूल्यों पर आधारित एकता का प्रतीक बना। भागवत ने अपने संबोधन में भारत को ‘विश्वगुरु’ बताते हुए सांस्कृतिक जागरण की पुकार की। उन्होंने कहा, “भारत हिंदू समाज और हिंदू राष्ट्र है।

धर्म, कर्तव्य, सेवा और त्याग को अपनाकर ही हम अपनी सभ्यता को मजबूत कर सकते हैं।” भागवत ने स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों—जैसे 1857 के विद्रोहियों और चंद्रशेखर आजाद—का स्मरण किया, जो भौतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए लड़े। उन्होंने आधुनिक चुनौतियों के बीच सनातनी चेतना को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया, जो राम मंदिर ध्वजारोहण जैसे आयोजनों से प्रेरित है।

योगी आदित्यनाथ ने भागवत की उपस्थिति में RSS की तीखी पैरवी की। उन्होंने संगठन के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए कहा, “RSS विदेशी फंडिंग पर नहीं चलता, बल्कि समाज की ताकत और सेवा भाव पर टिका है। कोई OPEC देश या अंतरराष्ट्रीय चर्च इसका फंडिंग स्रोत नहीं है। स्वयंसेवक स्वेच्छा से योगदान देते हैं।” योगी ने RSS के आलोचकों को ललकारा कि वे सेवा को ‘सौदेबाजी और प्रभाव’ का हथियार बनाने वालों से कुछ सीखें। उन्होंने गीता को 140 करोड़ भारतीयों के लिए ‘दिव्य मंत्र’ बताते हुए कहा कि यह सफलता का मार्ग और जीवनशैली है।

भाषणों से मिले प्रमुख संकेत
दोनों नेताओं के संबोधनों से सनातनी एजेंडे को गति मिलने के ये स्पष्ट संकेत उभरे:

हिंदू राष्ट्र की पहचान: भागवत का ‘भारत हिंदू राष्ट्र है’ बयान सांस्कृतिक आत्मविश्वास को मजबूत करता है। यह राम जन्मभूमि आंदोलन की परंपरा को आगे बढ़ाता है, जहां 25 नवंबर को अयोध्या में ध्वजारोहण होगा।

सेवा और समाज शक्ति: योगी का RSS की फंडिंग पर जोर, संगठन को ‘समाज-आधारित’ बताते हुए, हिंदुत्व को विकास से जोड़ता है। यह 2027 चुनावों से पहले BJP-RSS समन्वय का संकेत है।

गीता का प्रचार: कार्यक्रम गीता जयंती की तैयारी था, जो सनातन शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। योगी ने कहा, “भारतीय दृष्टि में युद्धक्षेत्र भी धर्मक्षेत्र है, जहां धर्म और कर्तव्य की विजय निश्चित है।”

आलोचकों पर प्रहार: दोनों ने ‘जनसांख्यिकीय बदलाव’ की साजिशों पर चेतावनी दी, जो सनातनी चेतना को खतरा बताती है।