राम मंदिर ध्वजारोहण पर बोले नृपेंद्र मिश्रा: ‘यह केवल समारोह नहीं, 500 वर्षों के संघर्ष पर विजय है’, दुनिया को मिलेगा रामराज्य का संदेश

यूपी : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कल होने वाले ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह को लेकर उत्साह चरम पर है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि 500 वर्षों के धैर्य, संघर्ष और न्याय की विजय का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह ध्वज दुनिया को यह संदेश देगा कि मंदिर का प्रमुख निर्माण अब पूर्ण हो चुका है, और प्रभु श्रीराम अपने वास्तविक स्थान पर विराजमान हैं।” मिश्रा का यह बयान रामभक्तों के बीच भावुकता की लहर ला रहा है।

ध्वजारोहण: सनातन गौरव की पुनर्स्थापना
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि 25 नवंबर को दोपहर 11:58 से 1 बजे के बीच शुभ मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के मुख्य शिखर पर विशेष केसरिया ध्वज फहराएंगे। यह ध्वज 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा है, जो पैराशूट फैब्रिक से तैयार किया गया है। ऊंचाई 191 फीट पर लहराने वाला यह ध्वज मीलों दूर से दिखाई देगा और रामराज्य की आदर्श परिकल्पना को दर्शाएगा। मिश्रा ने कहा, “यह ध्वजारोहण वैश्विक घोषणा है कि सनातन संस्कृति की जड़ें मजबूत हैं। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद यह विजय का क्षण है।”

मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसे ‘राम सबके और सबके राम’ की भावना का जीवंत प्रतीक बताया। ध्वज पर सूर्य और ॐ अंकित होगा, जो अहमदाबाद के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया है। मिश्रा ने आगे कहा कि सभी शिखरों पर लगे ध्वज स्थायी रहेंगे, जिन्हें साल में केवल एक-दो बार बदला जाएगा।

पीएम मोदी का अयोध्या दौरा: व्यस्त कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी 25 नवंबर को सुबह अयोध्या पहुंचेंगे और लगभग चार घंटे रहेंगे। सबसे पहले वे सप्त ऋषि मंदिर जाएंगे, जहां सातों ऋषियों की आराधना करेंगे। इसके बाद राम मंदिर पहुंचकर ध्वजारोहण करेंगे और विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम के लिए 6,000 से 8,000 गणमान्य अतिथियों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें जनवरी 2024 के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल न हो पाने वाले प्रमुख व्यक्ति भी शरीक होंगे।

  • दानवीर भक्तों का सम्मान: 2022 के बाद मंदिर को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक दान देने वाले भक्तों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
  • दर्शन की सुविधा: 26 नवंबर को रामलला के गर्भगृह को 16 घंटे से अधिक खुला रखा जाएगा, ताकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन कर सकें।

500 वर्षों का संघर्ष: न्याय की जीत
मिश्रा ने भावुक लहजे में कहा कि राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित है, जो अतीत की गलतियों को सुधारने की सीमा को दर्शाता है। उन्होंने पीएम मोदी के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, “यह मंदिर मात्र एक देव मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्रतीक है।” वेदों में ध्वज को ‘अग्नि ज्वाला’ और ‘उगता सूर्य’ कहा गया है, जो भगवा रंग की पवित्रता को रेखांकित करता है। यह आयोजन प्राण प्रतिष्ठा के अभिजीत मुहूर्त की तरह ही शुभ नक्षत्र-योग में हो रहा है।