बांग्लादेश से आई आधिकारिक चिट्ठी: शेख हसीना को सौंपने की मांग, भारत ने फैसला लेने से पहले MEA ने दिया ये जवाब

भारत : भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नया मोड़ आ गया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को औपचारिक पत्र भेजकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रत्यर्पण की मांग की है। यह चिट्ठी 17 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT-BD) द्वारा हसीना को ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ के आरोप में फांसी की सजा सुनाए जाने के तीन दिन बाद भेजी गई। हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान बांग्लादेश से भारत भाग आई थीं और तब से दिल्ली में ही रह रही हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पत्र का संज्ञान लिया है, लेकिन प्रत्यर्पण पर कोई फैसला लेने से पहले द्विपक्षीय संधि और कानूनी पहलुओं की समीक्षा की बात कही है।

क्या है पूरा मामला? ICT का फैसला और प्रत्यर्पण की मांग
बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने 23 नवंबर को कहा, “हमने भारत को आधिकारिक पत्र भेज दिया है। शेख हसीना और तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को प्रत्यर्पित करने का अनुरोध किया गया है।” ICT ने 17 नवंबर को हसीना (78 वर्षीय) और कमाल को ‘जुलाई विद्रोह’ के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों—जैसे हत्याएं, जबरन गायब करना और दमन—के आरोप में फांसी की सजा सुनाई। यह ट्रायल इन एब्सेंशिया (अनुपस्थिति में) था।

अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में यह दूसरा ऐसा अनुरोध है। दिसंबर 2024 में भी एक डिप्लोमैटिक नोट वर्बल भेजा गया था, जिसका भारत ने केवल संज्ञान लिया था। अब कानूनी सजा के बाद बांग्लादेश ने भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि 2013 का हवाला देते हुए दबाव बढ़ाया है। हुसैन ने कहा, “भारत को अतिरिक्त जिम्मेदारी है। हम ICC (अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय) का भी रुख कर सकते हैं।”

भारत का रुख: MEA का बयान और संधि की बाधाएं
विदेश मंत्रालय ने 17 नवंबर को ही बयान जारी कर कहा, “भारत ने ICT के फैसले का संज्ञान लिया है। एक पड़ोसी के रूप में, हम बांग्लादेश के लोगों के हित में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक संवाद जारी रखेंगे।” लेकिन प्रत्यर्पण पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

MEA ने पत्र को बांग्लादेश हाई कमीशन के माध्यम से प्राप्त किया। अब कानूनी सलाहकारों की समिति फैसला लेगी, जो हफ्तों ले सकती है।

बांग्लादेश में हंगामा, भारत में सियासी बहस
बांग्लादेश में हसीना समर्थकों ने फैसले को ‘राजनीतिक साजिश’ बताया, जबकि अंतरिम सरकार ने इसे न्याय का प्रतीक कहा। पूर्व गृह प्रमुख चौधरी अब्दुल्लाह अल मामुन को 5 साल की सजा मिली, जो गवाह बने। हसीना के लिए राज्य वकील जेड.आई. खान पन्ना नियुक्त किया गया है। भारत में विपक्ष ने MEA से पारदर्शिता की मांग की, जबकि सत्ताधारी दल ने कहा कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, “यह मामला भारत की दक्षिण एशिया नीति को प्रभावित करेगा। प्रत्यर्पण से संबंध बिगड़ सकते हैं, इनकार से तनाव।”