पंजाब में छिड़ी सियासी जंग : कृषि कानून, सीनेट-सिंडिकेट के बाद उठा चंडीगढ़ का मुद्दा, 26 का प्रदर्शन लेगा नई दिशा

पंजाब : पंजाब की राजनीति में तनाव चरम पर पहुंच गया है। 2020 के विवादास्पद कृषि कानूनों के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के सीनेट-सिंडिकेट विवाद ने किसानों और छात्रों को सड़कों पर उतार दिया, और अब चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के तहत लाने की केंद्र सरकार की प्रस्तावित योजना ने आग में घी डाल दिया है।

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और PU बचाओ मोर्चा ने 26 नवंबर को चंडीगढ़ में महाधरना और बैंड का ऐलान किया है, जो कृषि कानूनों की पांचवीं वर्षगांठ पर केंद्रित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन पंजाब की सियासत को नई दिशा दे सकता है, जहां AAP, कांग्रेस और BJP के बीच त्रिकोणीय जंग तेज हो रही है।

चंडीगढ़ विवाद का केंद्र: अनुच्छेद 240 से ‘पंजाब पर हमला’
केंद्र सरकार ने संसद के विंटर सेशन (1 दिसंबर से शुरू) में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश करने की योजना बनाई है, जो चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के दायरे में लाएगा। इससे राष्ट्रपति को शहर के प्रशासनिक नियंत्रण का अधिकार मिल जाएगा, जो पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी होने के बावजूद पंजाब के लिए भावनात्मक मुद्दा है। AAP और कांग्रेस ने इसे ‘पंजाब पर सीधा हमला’ करार दिया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “चंडीगढ़ हमारी राजधानी है, इसे केंद्र के हाथों बेचना स्वीकार नहीं। BJP पंजाब की पहचान मिटाने पर तुली है।” कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी आरोप लगाया कि यह कदम PU के सीनेट चुनावों में हेरफेर का हिस्सा है। BJP ने सफाई दी कि यह प्रशासनिक सुधार है, लेकिन किसान संगठनों ने इसे ‘साजिश’ बताते हुए 26 नवंबर को ‘चंडीगढ़ चलो’ मार्च का ऐलान किया है।

सीनेट-सिंडिकेट विवाद से भड़का आंदोलन
PU में सीनेट चुनाव अक्टूबर 2024 से लंबित हैं। केंद्र की 28 अक्टूबर की अधिसूचना ने यूनिवर्सिटी के गवर्निंग बॉडीज (सीनेट और सिंडिकेट) के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा, जिसे पंजाब ने ‘राज्य की संस्था पर कब्जे’ की कोशिश बताया। छात्रों का विरोध शुरू में सीमित था, लेकिन किसान यूनियनों, राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी के जुड़ने से यह क्षेत्रीय रंग ले लिया।

PU बचाओ मोर्चा ने 20 नवंबर को 25 नवंबर तक सीनेट चुनाव अधिसूचना की मांग की, अन्यथा 26 को कैंपस बैंड का ऐलान किया। 10 नवंबर को SKM नेता बलवीर सिंह राजेवाल के नेतृत्व में हजारों किसान-छात्रों ने बैरिकेड तोड़कर कैंपस में घुस गए। चंडीगढ़ पुलिस ने 2,000 जवान तैनात किए, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने लंगर चलाकर धरना जारी रखा। हिमाचल स्टूडेंट्स पार्टी ने ‘PU पंजाब का है’ नारे का विरोध किया, कहा कि इससे अन्य राज्यों के छात्र अलग-थलग पड़ गए।

26 नवंबर: पंजाब का ‘बड़ा दिन’, MSP से PU तक मांगें
SKM ने 26 नवंबर को कृषि कानूनों के खिलाफ 2020 के ऐतिहासिक आंदोलन की पांचवीं वर्षगांठ मनाने का फैसला किया है। दिल्ली बॉर्डर पर 736 किसानों की शहादत का जिक्र करते हुए पर्चे बांटे जा रहे हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में महाधरना होगी, जहां MSP की कानूनी गारंटी, चंडीगढ़ पर पूर्ण पंजाबी अधिकार, PU में पारदर्शी चुनाव और केंद्र की ‘पंजाब विरोधी’ नीतियों के खिलाफ संकल्प लिया जाएगा।

अपेक्षित भीड़: SKM से सबसे बड़ा जुटान, 1,000-1,500 छात्र, किसान यूनियंस, ट्रेड यूनियंस, राजनीतिक नेता (कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, पूर्व मंत्री परमिंदर सिंह ढिंडसा सहित)।
कार्रवाई योजना: कैंपस शटडाउन, BJP दफ्तरों का घेराव, रेल रोको-हाईवे ब्लॉक। पंजाब भर में 24×7 लंगर, निहंगों और कलाकारों (जैसे हर्फ चीमा) का समर्थन।
सुरक्षा इंतजाम: चंडीगढ़ पुलिस ने बॉर्डर पर चेकपॉइंट्स बढ़ाए, ट्रैफिक जाम की आशंका। किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा, “यह सिर्फ PU नहीं, पंजाब की संस्कृति और भूमि का सवाल है। आंदोलन दिल्ली तक पहुंचेगा।”