पैसों के लिए गैर मर्दों के साथ सोने का बनाता था दबाव, पति को मार डाला; पत्नी ने बताई हकीकत

यूपी : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। एक महिला और उसके नाबालिग बेटे ने मिलकर शराबी पति की निर्मम हत्या कर दी। पुलिस पूछताछ में पत्नी ने कबूल किया कि पति नशे की लत के चलते न सिर्फ घरवालों पर मारपीट करता था, बल्कि पैसों के लालच में उसे गैर मर्दों के साथ सोने के लिए मजबूर करने की कोशिश करता था। इस नर्क जैसी जिंदगी से तंग आकर मां-बेटे ने साजिश रच डाली। पुलिस ने 48 घंटे के अंदर ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
घरेलू हिंसा का खौफनाक चरम

घटना फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के मीरपुर गांव की है। 50 वर्षीय राजमल खेतीबाड़ी करके परिवार चलाता था। उसकी पत्नी रुक्मा (45 वर्ष) और 17 वर्षीय बेटा उसके साथ रहते थे। बेटी की शादी के बाद परिवार छोटा हो गया था, लेकिन राजमल की शराब की लत ने सब कुछ तबाह कर दिया। नशे में वह पत्नी-बेटे पर हाथ छोड़ देता था।

पूछताछ में रुक्मा ने बताया, “वह रोज नशा करके आता और पैसे मांगता। जब मैं मना करती, तो गालियां देता और कहता कि गैर मर्दों के पास जाकर पैसे लाओ, वरना घर से निकाल दूंगा।” यह प्रताड़ना महीनों से चल रही थी। रुक्मा ने सिहरते हुए कहा, “मैं अपनी इज्जत बचाने के लिए चुप रहती, लेकिन बेटा सब देखता था। वह भी तंग आ गया था।”

18 नवंबर की सुबह राजमल घर से निकला तो पत्नी-बेटा उसके पीछे-पीछे चल पड़े। सुनसान बड्डूपुर मार्ग पर पहुंचते ही बेटे ने पिता को धक्का दिया, जिससे वह गिर पड़ा। फिर दोनों ने लाठियों से उस पर हमला बोल दिया। राजमल की मौके पर ही मौत हो गई। शव को सड़क किनारे छोड़कर वे भाग आए। शुरू में पुलिस को हत्या का कोई सुराग नहीं मिला। ब्लाइंड मर्डर का केस लग रहा था। लेकिन सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन से शक की सुई पत्नी-बेटे पर गई।

पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ में रुक्मा टूट गई और पूरा राज खोल दिया। बेटा भी अपराध कबूल कर लिया। एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया, “यह घरेलू हिंसा का चरम रूप था। पत्नी ने साफ कहा कि पति की हरकतों से जिंदगी नर्क हो गई थी।” दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) और 3(5) (साझा इरादे से अपराध) के तहत मुकदमा दर्ज हो गया है।

यह मामला घरेलू हिंसा की गहराई को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शराब और आर्थिक दबाव से उपजी ऐसी क्रूरता आम हो रही है। रुक्मा जैसे पीड़ितों के पास मदद के लिए हेल्पलाइन (1098 या 181) हैं, लेकिन जागरूकता की कमी से मामले दब जाते हैं। गांववालों ने बताया कि राजमल की लत सब जानते थे, लेकिन हस्तक्षेप नहीं किया। अब पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है, लेकिन मुख्य आरोपी मां-बेटा ही साबित हुए।