प्रशांत किशोर ने लोगों से मांगे 1-1 हजार रुपए, बोले, “अब सिर्फ दानदाता से मिलूंगा!”दिल्ली का घर छोड़कर सारी संपत्ति जन सुराज को दान

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी की ‘जीरो’ पर हार के बाद संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक ऐसा कदम उठाया, जो राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला रहा है। भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे के मौन उपवास को तोड़ते हुए किशोर ने ऐलान किया कि दिल्ली में स्थित अपना एकमात्र घर परिवार के लिए रखकर बाकी सारी चल-अचल संपत्ति जन सुराज को दान कर देंगे।

इतना ही नहीं, अगले 5 सालों में अपनी कुल कमाई का 90 फीसदी हिस्सा भी पार्टी को समर्पित करेंगे। ऊपर से, जनता से अपील की कि हर व्यक्ति सालाना कम से कम 1 हजार रुपये का चंदा दे – तभी उनसे मिलेंगे। ये फैसला पार्टी को ‘जन-आधारित’ बनाने और ‘चोरी की राजनीति’ खत्म करने का दावा कर रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे ‘ड्रामा’ बता दिया।

प्रशांत किशोर ने बेतिया में पत्रकारों से कहा, “पिछले 20 सालों में जो भी संपत्ति कमाई – जमीन, फ्लैट, निवेश – सब जन सुराज को चला जाएगा। सिर्फ दिल्ली का एक घर रखूंगा, जहां परिवार रहेगा।” उन्होंने खुलासा किया कि 2021 से 2024 तक सलाहकारी फीस से 241 करोड़ रुपये कमाए, जिनमें से 98 करोड़ रुपये पहले ही जन सुराज को दान कर चुके हैं। 30 करोड़ से ज्यादा इनकम टैक्स भी दिया।

अब अगले 5 सालों की 90% कमाई – चाहे कितनी भी हो – पार्टी को जाएगी। किशोर ने कहा, “जरूरत पड़ी तो शरीर बेचकर भी पैसा लगाऊंगा, लेकिन बिहार की सियासत से भ्रष्टाचार खत्म करके रहूंगा।”

ये ऐलान 15 जनवरी 2026 से शुरू होने वाले नए ‘महिला-केंद्रित’ अभियान से जुड़ा है। किशोर ने बताया, “एनडीए ने महिलाओं को 2 लाख रुपये का वादा किया था, हम इसे दिलवाने के लिए हर वार्ड में फॉर्म भरवाएंगे। लेकिन पार्टी चलाने के लिए संसाधन चाहिए – इसलिए जनता से 1-1 हजार रुपये का चंदा। जो सालाना इतना न दे, उससे न मिलूंगा, न बात करूंगा।” जन सुराज की हेल्पलाइन (9121691216) पर चंदा जमा करने का ऐलान भी किया।

किशोर का ये ‘त्याग’ बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया। जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा, “पीके का समर्पण पार्टी को मजबूत बनाएगा। अब हम बाहरी फंडिंग पर निर्भर नहीं रहेंगे।” विपक्ष ने तंज कसा – आरजेडी के मनीष यादव ने बोला, “हार के बाद ड्रामा? 98 करोड़ दान का टैक्स बेनिफिट लेने का बहाना।”

भाजपा ने चुप्पी साधी, लेकिन नीतीश सरकार पर नक्सलवाद खत्म करने जैसे मुद्दों पर हमला बोला। विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम 2027 लोकसभा चुनाव से पहले जन सुराज का बेस मजबूत कर सकता है, खासकर युवाओं और महिलाओं में।